'टॉयलेट साफ कराते थे, सोने नहीं देते थे और...', हमास की कैद से रिहा हुई 4 इजरायली महिलाओं की आपबीती पढ़ कांप जाएगी रूह
चार महिला इजरायली सैनिकों, जिन्हें 200 फिलिस्तीनी कैदियों के बदले में शनिवार को फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह हमास द्वारा रिहा किया गया था, ने कैद में अपनी पीड़ा का वर्णन किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें गाजा में अपने अपहर्ताओं के लिए खाना बनाना पड़ता था और उनके बच्चों की देखभाल करनी पड़ती थी.
इजरायल और हमास के बीच युद्ध विराम हो गया है. समझौते के तहत हमास ने शनिवार को 4 इजरायली महिलाओं को रिहा किया. इसके बदले इजरायल ने भी 200 फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा गया. रिहा हुई चारों महिलाओं के नाम करीना एरीव, डेनिएला गिल्बोआ, नामा लेवी और लिरी अलबाग हैं. हमास ने इन चारों को शनिवार को रेड क्रास को सौंपा था. अब ये चारों महिलाएं अपने हम वतन पहुंच चुकी है. हम वतन पहुंचने पर इन्होंने हमास की कैद में बिताए गए खतरनाक पलों के बारे में बताया है.
चारों महिलाओं ने बताया कि उन्हें कैद के दौरान पूरे गाजा का भ्रमण कराया गया. जहां उन्हें रखा जाता था वहां सूरज की रोशनी तक नहीं पहुंचती थी और सांस लेने में भी तकलीफ होती थी. अधिकतर समय अंधेरे में ही कटता था. इसके सआथ हमास के कुछ वरिष्ठ आतंकियों से भी महिलाओं की मुलाकात कराई गई थी.
चारों को एक साथ रखा गया और उन्हें अपने अपहरणकर्ताओं के बच्चों की देखभाल करनी पड़ी. तेल अवीव स्थित वाईनेट न्यूज ने इजरायली पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन के हवाले से बताया कि इस दौरान उन्होंने अरबी भाषा बोलना भी सीखा.
कैद के पहले दिनों में उनके साथ एक वयस्क रहता था जो उनके खाने-पीने और नहाने-धोने का ध्यान रखता था. वह व्यक्ति उनके और आतंकवादियों के बीच मध्यस्थता करता था. वे फिलिस्तीनी महिलाओं के वेश में रहती थीं और गाजा शहर में एक जगह से दूसरी जगह जाती थीं और अक्सर सुरंगों में रहती थीं. कभी-कभी खाना नहीं मिलता था और आईडीएफ की बमबारी के दौरान वे "एक-दूसरे को पकड़ कर रखती थीं."