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'आपने वादा किया था...', जेल में बंद इमरान खान की पूर्व पत्नी जेमिमा गोल्डस्मिथ ने एलन मस्क से लगाई गुहार

जेमिमा गोल्डस्मिथ ने एलन मस्क से अपील कर आरोप लगाया है कि इमरान खान की जेल स्थिति पर उनके पोस्ट एक्स पर दबाए जा रहे हैं, जिससे अभिव्यक्ति की आजादी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

Imran Khan instagram
Sagar Bhardwaj

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी और जेल में कथित हालात एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा में हैं. इस बार मुद्दा उनकी पूर्व पत्नी जेमिमा गोल्डस्मिथ की सार्वजनिक अपील से जुड़ा है. उन्होंने एक्स के मालिक एलन मस्क पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इमरान खान से जुड़े उनके पोस्ट जानबूझकर कम लोगों तक पहुंचाए जा रहे हैं. जेमिमा का कहना है कि यह डिजिटल सेंसरशिप अभिव्यक्ति की आजादी के मूल विचार के खिलाफ है.

एलन मस्क से सीधी अपील

जेमिमा गोल्डस्मिथ ने एलन मस्क को टैग करते हुए कहा कि इमरान खान पिछले 22 महीनों से एकांत कारावास में हैं और उन्हें एक राजनीतिक कैदी की तरह रखा गया है. उन्होंने लिखा कि सत्ता से हटाए जाने के बाद से इमरान खान को लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है.

बेटों से संपर्क पूरी तरह बंद

जेमिमा के अनुसार, इमरान खान के दोनों बेटे महीनों से अपने पिता से न तो मिल पाए हैं और न ही बात कर सके हैं. उन्हें पत्र भेजने तक की अनुमति नहीं दी जा रही. जेमिमा ने इसे एक परिवार को तोड़ने की कोशिश बताया और कहा कि यह अमानवीय व्यवहार है.

एक्स पर घटती पहुंच का दावा

उन्होंने आरोप लगाया कि 35 लाख से अधिक फॉलोअर्स होने के बावजूद उनके अकाउंट की रीच अचानक गिर गई है. जेमिमा के मुताबिक, 2023–24 में जहां उनके पोस्ट करोड़ों इम्प्रेशन पा रहे थे, वहीं 2025 में यह संख्या लगभग 97 प्रतिशत तक घट गई.

एल्गोरिदम और ग्रोक का हवाला

जेमिमा ने एक्स के एआई टूल ‘ग्रोक’ के विश्लेषण का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके अकाउंट पर गुप्त थ्रॉटलिंग की जा रही है. उनका दावा है कि इमरान खान से जुड़े संवेदनशील पोस्ट एल्गोरिदम के जरिए छिपाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि आपने  (मस्क) ने वादा किया था कि एक्स अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित करेगा और वैध राजनीतिक अभिव्यक्ति को चुप नहीं कराएगा.

इमरान खान की जेल क्रिया

बता दें कि इमरान खान अगस्त 2023 से विभिन्न मामलों में सजा के बाद जेल में हैं. संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने उनकी हिरासत को मनमाना बताया है. हालांकि, पाकिस्तानी सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है और इसे आंतरिक मामला बताती है.