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Explainer: क्या बदले की आग में अंधा हुआ इजराइल? फिलिस्तीनी बंधकों से हो रहा ये सलूक, जानें UN का दावा

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने भी पिछले सप्ताह कहा था कि गाजा के बंदियों के साथ इजरायल का व्यवहार यातना के समान है. इस आरोपों के संबंध में जब इजराइली सेना से सवाल किया गया तो जवाब मिला कि आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के संदेह में लोगों को हिरासत में लिया जाता है. जो लोग निर्दोष पाए जाते हैं उन्हें रिहा कर दिया जाता है.

Om Pratap

Israel Hamas war Israeli military torture Gaza Detainees: इजराइल हमास के जारी जंग के बीच संयुक्त राष्ट्र कार्यालय ने बड़ा दावा किया है. कहा गया है कि इजराइल ने गाजा की जिन महिलाओं और पुरुषों को बंदी बनाया था, उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है. दावे के मुताबिक, इजराइली मिलिट्री के जवानों ने बंधक बनाई गई महिलाओं और पुरुषों को न्यूड कर दिया, उन्हें बेरहमी से पीटा गया और कुछ को तो गायब कर दिया गया. संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के मुताबिक, बंदियों के जो व्यवहार किया जा रहा है, वो यातना से कम नहीं है. अनुमान है कि हजारों की संख्या में फिलिस्तीनी लोगों को बंधक बनाया गया और उन्हें कठिन परिस्थितियों में रखा गया. 

न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर की शुरुआत में M16 असॉल्ट राइफलों से लैस इजरायली सैनिकों ने अयमान लुब्बाड दर्जनों फिलिस्तीनी पुरुषों और लड़कों को बंधक बनाया था. एक तस्वीर सामने आई थी, जिसमें फिलिस्तीनी बंधक घुटनों के बल बैठे दिखे. कहा गया कि ये वो बंधक थे, जिन्हें उत्तरी गाजा में उनके घरों से जबरन निकाला गया था. उस वक्त क्लिक की गई तस्वीरों और वीडियोज में फिलिस्तीनी बंधक सड़क पर सेमी न्यूड हालत में बैठे दिखे. 

एक वीडियो में एक इजराइली सैनिक बंदियों पर चिल्लाते दिखा. इजराइली सैनिक ने कहा कि हम पूरे गाजा पर कब्जा कर रहे हैं. क्या आप यही चाहते थे? क्या आप हमास को अपने साथ चाहते हैं? मुझे मत बताओ कि तुम हमास नहीं हो. इसके बाद कुछ बंदियों ने हाथ ऊपर कर आपत्ति जताई. एक ने कहा कि मैं तो दिहाड़ी मजदूर हूं. इसके बाद इजराइली सैनिक ने चिल्लाते हुए उस बंधक से चुप रहने को कहा. फिलिस्तीनी कैदियों और बंदियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों ने एक रिपोर्ट में इसी तरह की जानकारियां दीं, जिसमें इजराइल पर फिलिस्तीनियों की हिरासत और फिर उनके साथ अमानवीय व्यवहार का आरोप लगाया गया. आगे हम आपको करीब एक दर्जन बंदियों या फिर उनके रिश्तेदारों की आपबीती बता रहे हैं, जिन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में चौंकाने वाली जानकारियां दीं. 

बंदियों के रिश्तेदारों के अनुसार, पिछले तीन महीनों में गाजा से फिलीस्तीनी लोगों को बंधक बनाया जा रहा है. इसके बाद उनकी पिटाई की जा रही है. पूछताछ की जा रही है. 7 अक्टूबर को हमास के नेतृत्व वाले हमले के बाद गाजा पर हमला करने वाली इजरायली सेना ने हजारों पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को हिरासत में ले लिया. कुछ को उनके घरों से बाहर निकालने का आदेश दिया गया और उन्हें बंधक लिया गया. हालांकि, इनमें से कुछ को कुछ समय बाद छोड़ दिया गया. 

गाजा के पत्रकारों की ओर से ली गई तस्वीरों में रिहा किए गए बंदियों को अस्पतालों में इलाज करते हुए दिखाया गया है. इसके अलावा गाजा शहर में एक स्टेडियम में शूट किए गए वीडियो में दर्जनों फिलिस्तीनी पुरुष सिर्फ अंडरवियर में दिखे. इनमें कुछ युवा भी थे. इनके साथ महिलाएं और लड़कियां भी थीं, लेकिन वो पूरे कपड़ों में थीं. 22 साल के एक बंदी हदील अल दहदौह की तस्वीर पिछले महीने सामने आई थी, जो कुछ अन्य बंदियों से भरे ट्रक में दिखा था. तस्वीर में उसकी आंखों पर पट्टी बंधी दिख रही थी. वो फिलहाल लापता है. 

  • इजराइली सैनिकों की ओर से बंधक बनाई गई 31 साल की अल थाथा ने बताया कि वो अपने पति रुश्दी अल थाथा के साथ गाजा में थी. इजराइली सैनिकों ने उन्हें और उनके पति को 5 दिसंबर को बंधक बनाया था. हालांकि 25 दिनों बाद दोनों को छोड़ दिया गया था. बातचीत के दौरान रुश्दी अल थाथा ने बताया कि इजराइली सैनिकों ने उनकी पिटाई की थी.
  • 7 दिसंबर को लुब्बाड नाम के शख्स को भी बंधक बनाया गया था. दरअसल, उस दिन लुब्बाड अपनी पत्नी के साथ माता-पिता के घर गए. कुछ दिनों पहले ही लुब्बाड की पत्नी ने तीसरे बच्चे को जन्म दिया था. जैसे ही वे अपने माता पिता के घर पहुंचा, घर के बाहर गोलियों और टैंकों की आवाज आने लगी. तभी एक इजराइली सैनिक ने चिल्लाकर आवाज लगाई और सभी लोगों को घरों से बाहर निकलने और सरेंडर करने को कहा. थोड़ी देर बाद जैसे ही लुब्बाड बाहर निकला, उसका सामना इजराइली सैनिक से हुआ, जिसने उसने घुटने टेकने और दिसंबर की ठंड में कपड़े उतारने को मजबूर किया. 
  • बताया जा रहा है कि लुब्बाड फिलिस्तीनी मानवाधिकार केंद्र के मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं. उन्होंने बताया कि करीब एक सप्ताह तक उन्हें बंधक बनाए रखा गया. लुब्बाड ने कहा कि मुझे अन्य बंदियों के साथ जबरन ट्रकों में डाल दिया गया, सभी बंदियों की आंखों पर पट्टी बांध दी गई और उनके हाथ भी बांध दिए गए. फिर इजराइली सैनिकों ने सभी बंधकों की पिटाई की. इसके बाद इजराइल में घंटों तक घुमाया गया. लुब्बाड के मुताबिक, जब वे दक्षिणी इजराइली शहर बेयर शेवा की जेल में पहुंचे तो उन्हें कपड़े दिए गए. इसके साथ ही हर बंधक को नीले टैग पर एक नंबर दिया गया और गार्ड उन्हें नाम से नहीं, बल्कि उनके नंबर से बुलाते थे.
  • अस्पताल में इलाज करा रहे, कुछ अन्य कैदियों ने भी इसी तरह की कहानी बताई. इनमें से एक चार बच्चों के पिता और सेवानिवृत्त सिविल सेवक 50 साल के माजदी अल-दारिनी ने कहा कि उन्हें 40 दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया. उन्होंने कहा कि मुझे नवंबर के मध्य में हिरासत में लिया गया था. इस दौरान वे अपने परिवार के साथ गाजा छोड़कर साउथ की ओर जा रहे थे. माजदी ने कहा कि इजराइली सैनिकों ने हमारे साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया. 

वहीं, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने भी पिछले सप्ताह कहा था कि गाजा के बंदियों के साथ इजरायल का व्यवहार यातना के समान है. इस आरोपों के संबंध में जब इजराइली सेना से सवाल किया गया तो जवाब मिला कि आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के संदेह में लोगों को हिरासत में लिया जाता है. जो लोग निर्दोष पाए जाते हैं उन्हें रिहा कर दिया जाता है. ये भी कहा गया कि इजरायली अधिकारी अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार बंदियों के साथ व्यवहार करते हैं. जब इजराइली सेना से फिलिस्तीनी बंधकों को जबरन कपड़े उतारने के लिए मजबूर करने वाला सवाल पूछा गया तो जवाब मिला कि ऐसा इसलिए किया जाता है कि सुनिश्चित किया जा सके कि उन्होंने कपड़े के अंदर कोई विस्फोटक या अन्य हथियार तो नहीं रखा है.  

मानवाधिकार रक्षकों ने भी लगाए ये आरोप

उधर, मानवाधिकार रक्षकों की ओर से भी आरोप लगाया गया कि इजरायल की ओर से गाजा में फिलिस्तीनियों को हिरासत में लेना और उनके साथ अपमानजनक व्यवहार करना युद्ध के अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हो सकता है. कई फिलिस्तीनी अधिकार समूहों (फिलिस्तीनी कैदी आयोग भी शामिल) की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि गाजा में इजरायली बमबारी और जमीनी आक्रमण की शुरुआत के बाद से, इजरायली सेना ने सैकड़ों फिलिस्तीनियों को बर्बरता से बंधक बनाया. बंदियों के साथ अमानवीय व्यवहार दिखाने वाली तस्वीरें और वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि अब तक इजराइल ने गाजा से बंधक बनाए गए फिलिस्तीनियों की संख्या का खुलासा भी नहीं किया है. साथ ही वकीलों और रेड क्रॉस को बंदियों से मिलने से रोका है. 

रेड क्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति के प्रवक्ता ने क्या कहा?

रेड क्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति के प्रवक्ता हिशम मन्ना ने कहा कि उनके संगठन को गाजा में परिवारों से हिरासत में लिए गए परिवार के सदस्यों के बारे में रोजाना की रिपोर्ट मिलती है. उन्होंने कहा कि हमारा संगठन गाजा से गायब हुए करीब 4000 फिलिस्तीनियों के बारे में जानकारी जुटा रहा है, जिनमें से करीब आधे यानी 2000 लोगों को इजरायली सेना की ओर से हिरासत में लिया गया माना जाता है. हम लगातार बंदियों की स्थितियों और ठिकानों के बारे में जानकारी मांग रहे हैं और मुलाकात कराने पर भी जोर दे रहे हैं.