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PM नेतन्याहू के समर्थन में खुलकर सामने आए ट्रंप, इजरायली राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखकर मांगा 'क्षमादान'

नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा पर आरोप है कि उन्होंने अरबपतियों से करीब 2.6 लाख डॉलर के लग्जरी गिफ्ट्स राजनीतिक फायदे के बदले स्वीकार किए.

ani
Sagar Bhardwaj

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर उनके समर्थन में उतर आए हैं. बुधवार को ट्रंप ने इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग को एक चिट्ठी लिखकर नेतन्याहू को ‘पूर्ण माफी’ देने की अपील की.

नेतन्याहू पर लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार के तीन मामलों में ट्रायल जारी है, जिनमें वे खुद को निर्दोष बताते हैं. ट्रंप ने इस मामले को “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” करार दिया है.

ट्रंप ने लिखा- नेतन्याहू को किया जाए माफ

ट्रंप ने अपने पत्र में लिखा कि वे इज़राइल की न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हैं, लेकिन नेतन्याहू के खिलाफ दर्ज केस “अनुचित और राजनीतिक रूप से प्रेरित” हैं. उन्होंने कहा कि नेतन्याहू ने इज़राइल की सुरक्षा और मध्य पूर्व में शांति के लिए ऐतिहासिक योगदान दिया है. ट्रंप ने इसे एक “ऐतिहासिक समय” बताया जब दोनों देशों ने मिलकर 3,000 वर्षों से प्रतीक्षित शांति स्थापित की है.

नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा पर आरोप है कि उन्होंने अरबपतियों से करीब 2.6 लाख डॉलर के लग्जरी गिफ्ट्स राजनीतिक फायदे के बदले स्वीकार किए. इसके अलावा, उन पर मीडिया कवरेज को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश करने के भी आरोप हैं. नेतन्याहू सभी आरोपों से इनकार करते हुए इसे विपक्ष की साजिश बताते हैं.

हर्जोग ऑफिस ने दी प्रतिक्रिया

ट्रंप की अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति हर्ज़ोग के कार्यालय ने कहा कि वे ट्रंप को “उच्च सम्मान” में रखते हैं और उनके समर्थन की सराहना करते हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि किसी भी व्यक्ति को राष्ट्रपति माफी पाने के लिए “निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार औपचारिक आवेदन” देना आवश्यक है.

नेतन्याहू की नीतियों पर बढ़ा विरोध

नेतन्याहू ने अपने मौजूदा कार्यकाल में न्यायिक सुधारों के व्यापक प्रस्ताव रखे थे, जिनका देशभर में भारी विरोध हुआ. आलोचकों ने कहा कि इन सुधारों से न्यायपालिका की स्वतंत्रता कमजोर होगी. अक्टूबर में ट्रंप ने अपनी यात्रा के दौरान नेतन्याहू के खिलाफ आरोपों को “बेकार” बताते हुए कहा था— “सिगार और शैंपेन की क्या परवाह.”