'ट्रंप इसे जीत बताएंगे लेकिन...', ईरान-अमेरिका समझौते पर कमला हैरिस का बड़ा हमला
पूर्व अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने ईरान के साथ हुए समझौते को लेकर ट्रंप प्रशासन की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि इस समझौते के राजनीतिक और आर्थिक असर आगामी मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनौती बन सकते हैं.
अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौते को लेकर अमेरिकी राजनीति में बहस तेज हो गई है. पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में इस समझौते पर सवाल उठाते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन इसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करेगा, लेकिन इसके वास्तविक परिणामों का आकलन समय के साथ होगा. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि विदेश नीति से जुड़े फैसले आने वाले मध्यावधि चुनावों में मतदाताओं की सोच को प्रभावित कर सकते हैं.
समझौते को लेकर उठाए सवाल
ऑस्ट्रिया में आयोजित एक जलवायु सम्मेलन के दौरान कमला हैरिस ने ईरान के साथ हुए समझौते पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि मौजूदा वार्ताओं और समझौते को लेकर कई सवाल अभी बाकी हैं. हैरिस का मानना है कि किसी भी समझौते को उसकी घोषणा से नहीं, बल्कि उसके परिणामों से परखा जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी जनता विदेश नीति के उन फैसलों को करीब से देख रही है, जिनका असर देश की अर्थव्यवस्था और वैश्विक स्थिति पर पड़ सकता है.
ओबामा दौर के समझौते से की तुलना
हैरिस ने अपने बयान में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए परमाणु समझौते का भी जिक्र किया. उनका कहना था कि वर्तमान समझौते को लेकर जो उम्मीदें जताई जा रही हैं, वे उन्हें पुराने दौर की याद दिलाती हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन किसी भी परिणाम को अपनी जीत के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम निष्कर्ष तब सामने आएंगे जब समझौते के सभी पहलुओं और उसके प्रभावों की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी.
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तेल की कीमतों और चुनावी माहौल पर चर्चा
पूर्व उपराष्ट्रपति ने युद्ध और ऊर्जा बाजार के बीच संबंध का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय तनाव का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है. ईंधन और रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती कीमतें पहले ही लोगों के लिए चिंता का विषय रही हैं. ऐसे में विदेश नीति के फैसलों का आर्थिक असर चुनावी माहौल को भी प्रभावित कर सकता है. उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी मध्यावधि चुनावों में मतदाता इन मुद्दों को ध्यान में रखकर फैसला करेंगे.
अगले 60 दिन होंगे निर्णायक
ईरान और अमेरिका के बीच हुआ समझौता अब आगे की बातचीत के चरण में प्रवेश करने वाला है. प्रस्तावित व्यवस्था के तहत आने वाले 60 दिनों में कई तकनीकी और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होगी. इस दौरान यह देखा जाएगा कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और अन्य प्रतिबद्धताओं को लेकर कितनी प्रगति दिखाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस अवधि के नतीजे ही तय करेंगे कि यह समझौता लंबे समय तक टिकाऊ साबित होगा या नहीं. फिलहाल अमेरिकी राजनीति में इस मुद्दे को लेकर बहस और तेज होने के संकेत दिखाई दे रहे हैं.