इजरायल-हिजबुल्लाह युद्धविराम पर ट्रंप का बड़ा दावा, क्या शांति समझौते का श्रेय खुद को दे रहे हैं अमेरिकी राष्ट्रपति?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुलासा किया है कि उन्होंने इजरायल से हिजबुल्लाह के साथ संघर्ष विराम बनाए रखने का आग्रह किया था.
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बाद इजरायल और हिजबुल्लाह ने भी शांति समझौता स्वीकार किया. जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस शांति समझौते को लेकर बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि इजरायल से हिजबुल्लाह के साथ युद्धविराम बनाए रखने और सैन्य कार्रवाई में संयम दिखाने का आग्रह किया था.
ट्रंप के अनुसार, लेबनान में बढ़ती हिंसा से न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा था, बल्कि ईरान के साथ चल रही महत्वपूर्ण शांति वार्ताओं पर भी इसका असर पड़ सकता था. इसी वजह से उन्होंने संपर्क कर हालात को बिगड़ने से रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया.
शांत दिमाग से फैसले लेने की जरूरत
ट्रंप ने कहा कि कई बार तनावपूर्ण परिस्थितियों में धैर्य और समझदारी सबसे प्रभावी हथियार साबित होती है. उन्होंने संकेत दिया कि उन्होंने इजरायली नेतृत्व से बातचीत की, हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या उनकी सीधी चर्चा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से हुई थी. ट्रंप का यह बयान उस समय सामने आया जब इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष विराम लागू होने की खबरें सामने आईं. यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने खुद को शांति दूत के रूप में प्रस्तुत किया हो. इससे पहले भी वह कई मौकों पर दुनिया के सामने स्वयं को शांति स्थापित करने वाले नेता के तौर पर पेश कर चुके हैं.
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युद्ध विराम के बाद भी सैन्य गतिविधियां?
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम स्थानीय समयानुसार शाम के समय प्रभावी हुआ. इस समझौते को संभव बनाने में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों की महत्वपूर्ण भूमिका रही. कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि विभिन्न पक्षों के बीच लगातार संपर्क और वार्ताओं के बाद यह सहमति बन सकी. युद्धविराम लागू होने के बाद क्षेत्र में हिंसा की घटनाओं में कमी देखी गई, हालांकि शुरुआती घंटों में कुछ सैन्य गतिविधियों की रिपोर्ट सामने आई. इसके बावजूद स्थिति पहले की तुलना में अधिक शांत बताई जा रही है.विशेषज्ञों का मानना है कि लेबनान में बढ़ता संघर्ष अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताओं के लिए चुनौती बन सकता था. अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के एमओयू पर साइन कर लिया गया है, जिसके बाद दोनों दोनों देशों के बीच अगले 60 दिनों तक बातचीत जारी रहने वाली है.