नई दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप ईरान में सरकार बदलने की बात खुले तौर पर उठा रहे हैं. नॉर्थ कैरोलिना के फोर्ट ब्रैग में सैनिकों से मुलाकात के बाद रिपोर्टरों से बात करते समय ट्रंप ने कहा कि तेहरान में सत्ता में बदलाव सबसे अच्छी बात होगी जो हो सकती है क्योंकि उनका प्रशासन मिलिट्री एक्शन लेने के बारे में सोच कर रहा है.
ईरान के धार्मिक शासन का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि 47 साल से वे बातें ही करते आ रहे हैं. इस बीच जब वे बातें कर रहे थे, तब से हमने बहुत सी जानें गंवा दी हैं. ट्रंप ने कहा, 'पैर उड़ गए, हाथ उड़ गए, चेहरे उड़ गए. हम लंबे समय से यह सब कर रहे हैं.' ट्रंप ने ईरान के मौजूदा लीडरशिप के वारिस का नाम बताने से इनकार कर दिया और सिर्फ इतना ही कहा, 'लोग हैं.'
ट्रंप की यह बात मिडिल ईस्ट में दूसरे US एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप की तैनाती की पुष्टि के कुछ घंटों बाद आई. ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा कि अगर हम कोई डील नहीं करते हैं, तो हमें इसकी जरूरत पड़ेगी. उन्होंने कहा कि अगर हमें एक बहुत बड़ी फोर्स की जरूरत पड़ी तो हम इसे तैयार रखेंगे.'
ट्रंप ने तुरंत किसी मिलिट्री एक्शन का ऐलान नहीं किया, लेकिन इशारा दिया कि अगर डिप्लोमेसी फेल हो जाती है तो वॉशिंगटन और ज्यादा एक्शन के लिए तैयार है.
USS गेराल्ड आर फोर्ड, दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर, कैरिबियन से मिडिल ईस्ट ले जाया जा रहा है. यह USS अब्राहम लिंकन के साथ जुड़ेगा, जो पहले से ही इस इलाके में दूसरे US नेवल एसेट्स के साथ काम कर रहा है.
ट्रंप ने कहा कि अगर तेहरान के साथ उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बातचीत फेल हो जाती है, तो एक्स्ट्रा डिप्लॉयमेंट का मकसद फायदा उठाना है.
ट्रंप ने उम्मीद जताई कि डिप्लोमेसी कामयाब होगी, लेकिन अगर यह फेल हो जाती है तो इसके नतीजे भुगतने होंगे. उन्होंने कहा कि उनको लगता है कि वे कामयाब होंगे. अगर वे नहीं होते हैं, तो यह ईरान के लिए बुरा दिन होगा, बहुत बुरा.
गुरुवार को टाइमलाइन के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि अगले महीने तक, कुछ ऐसा ही होगा. उन्हें बहुत जल्दी सहमत हो जाना चाहिए.
बुधवार को ट्रंप ने इजराइली प्राइम मिनिस्टर बेंजामिन नेतन्याहू के साथ भी लंबी बातचीत की. उन्होंने कहा कि उन्होंने नेतन्याहू से कहा कि तेहरान के साथ बातचीत जारी रहनी चाहिए. एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, नेतन्याहू एडमिनिस्ट्रेशन पर दबाव डाल रहे हैं कि किसी भी डील के लिए ईरान को अपने बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर रोक लगानी होगी और हमास और हिज्बुल्लाह जैसे मिलिटेंट ग्रुप्स को सपोर्ट देना बंद करना होगा.