नई दिल्ली: US और ईरान के बीच न्यूक्लियर बातचीत चल रही है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची दूसरे राउंड की बातचीत के लिए जिनेवा पहुंच गए हैं लेकिन पर्दे के पीछे माहौल काफी गरम है. रिपोर्ट्स के मुताबिक दिसंबर में फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में अपनी मीटिंग के दौरान ट्रंप ने नेतन्याहू से साफ कहा था कि अगर US और ईरान के बीच डील नहीं होती है, तो वह ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर इजराइली हमले का सपोर्ट करेंगे.
सूत्रों के मुताबिक US मिलिट्री और इंटेलिजेंस एजेंसियों के बीच इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि अगर इजराइल ईरान पर हमला करता है तो US उसकी मदद कैसे कर सकता है. चर्चा इस बात पर कम है कि US सीधे हमला करेगा या नहीं, बल्कि इस बात पर है कि वह इजराइल को कैसे सपोर्ट कर सकता है.
अंदरूनी चर्चाओं के मुताबिक इस बात पर विचार किया जा रहा है कि क्या US एयर फोर्स इजराइली फाइटर जेट्स को हवा में रीफ्यूलिंग में मदद कर सकती है. इसके अलावा एक बड़ा सवाल यह है कि कौन से देश इजराइली एयरक्राफ्ट को अपने एयरस्पेस से उड़ने देंगे. जॉर्डन, सऊदी अरब और यूनाइटेड अरब अमीरात जैसे देशों ने पब्लिकली कहा है कि वे ईरान पर किसी भी हमले के लिए अपने एयरस्पेस का इस्तेमाल नहीं होने देंगे. इसलिए, यह साफ नहीं है कि संभावित कार्रवाई का रास्ता कैसे तय किया जाएगा.
इस बीच US ने वेस्ट एशिया में अपनी मिलिट्री ताकत बढ़ा दी है. खबर है कि दूसरा US एयरक्राफ्ट कैरियर, USS गेराल्ड आर. फोर्ड, भी इस इलाके में भेजा जा रहा है. यह मौजूदा US मिलिट्री फोर्स के साथ मिलकर ईरान के पास भारी हथियारों की मौजूदगी पक्का करेगा. ट्रंप ने इसे एक एहतियाती कदम बताया है और कहा है कि अगर बातचीत फेल हो जाती है तो US तैयार रहना चाहता है. इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ईरान के साथ डील से पहले ट्रंप के सामने कुछ शर्तें भी रखीं हैं लेकिन अभी तक कोई लिखित एग्रीमेंट नहीं हुआ है.
US और ईरान के बीच मंगलवार को जेनेवा में ओमानी मीडिएशन के तहत बातचीत का दूसरा राउंड होने वाला है. US के रिप्रेजेंटेटिव स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इसमें हिस्सा लेंगे. सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने कहा है कि प्रेसिडेंट ट्रंप पहले बातचीत चाहते हैं, लेकिन सभी ऑप्शन खुले हैं.