ट्रंप के लिए बड़ी कूटनीतिक भूल साबित हो रही ईरान से जंग? नाटो देश का भी नहीं मिल रहा साथ; अलग-थलग पड़ा US!
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ युद्ध में अलग-थलग पड़ गए हैं. सहयोगियों की अनदेखी, सेना का इनकार और होर्मुज जलमार्ग की पाबंदी ने अमेरिका को रणनीतिक रूप से बैकफुट पर धकेल दिया है.
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच अमेरिका की रणनीतिक मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो और ब्रिटेन जैसे पुराने सहयोगियों को भरोसे में लिए बिना ईरान के खिलाफ मोर्चा तो खोल दिया, लेकिन अब वे खुद को अकेला पा रहे हैं. वेनेजुएला की सफलता से उत्साहित अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश की थी, लेकिन परिणाम उम्मीद के विपरीत निकले हैं. अब ट्रंप अंतरराष्ट्रीय मदद के लिए हाथ-पांव मार रहे हैं.
ट्रंप ने पहले ब्रिटेन जैसे 'जिगरी' दोस्त को यह कहकर ठुकरा दिया था कि अब अमेरिका को उसकी जरूरत नहीं है. उन्होंने सोशल मीडिया पर ब्रिटिश पीएम स्टार्मर को खरी-खोटी सुनाई थी. लेकिन अब स्थिति बदलते ही ट्रंप उन्हीं देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य को खुलवाने के लिए युद्धपोत भेजने की अपील कर रहे हैं. यह विरोधाभास ट्रंप की गिरती हुई कूटनीतिक साख और युद्ध के बढ़ते दबाव को दर्शाता है.
चीन से चौंकाने वाली उम्मीद
हैरानी की बात यह है कि ट्रंप अब चीन से भी ईरान के खिलाफ मदद मांग रहे हैं. यह वही चीन है जिसे ट्रंप व्यापार युद्ध और टैरिफ के जरिए दबाने की कोशिश करते रहे हैं. ट्रंप अच्छी तरह जानते हैं कि चीन और ईरान के रिश्ते मजबूत हैं, फिर भी वह सार्वजनिक रूप से आशा जताकर अपनी नाकामी का ठीकरा दूसरों पर फोड़ना चाहते हैं. इससे वह खुद को जिम्मेदारी से बचा सकेंगे.
अमेरिकी सेना का इनकार
ट्रंप को अपनी ही सेना से बड़ा झटका लगा है. राष्ट्रपति ने दावा किया था कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज में फंसे सभी जहाजों को सुरक्षा (एस्कॉर्ट) देगी. हालांकि, अमेरिकी सेना ने स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा हालात में यह मुमकिन नहीं है. सेना की इस बेबसी ने ट्रंप के साहसी दावों की हवा निकाल दी है. अब ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मदद की मांग कर गेंद दूसरों के पाले में डाल दी है.
तुर्की ने झाड़ा पल्ला
नाटो सहयोगी तुर्की ने भी इस जंग से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया है. राष्ट्रपति एर्दोगन ने स्पष्ट किया कि उनका प्राथमिक कार्य अपने देश को खतरों से बचाना है. ईरान की मिसाइलों द्वारा तुर्की के हवाई क्षेत्र के उल्लंघन के बावजूद, वे इस संघर्ष में शामिल होने से बच रहे हैं. तुर्की के इस कड़े रुख ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका इस क्षेत्रीय लड़ाई में पूरी तरह अलग-थलग पड़ चुका है.
वैश्विक चुप्पी और बढ़ता संकट
ट्रंप की 'होर्मुज दावत' पर फ्रांस, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने भी चुप्पी साध रखी है. कोई भी देश ट्रंप की जंग में कूदने को तैयार नहीं है. अकेले चलने की ट्रंप की जिद अब उनके अरमानों पर पानी फेर रही है. सहयोगी देशों की बेरुखी और घरेलू सेना का इनकार यह साबित करता है कि ईरान के खिलाफ मोर्चा खोलना अमेरिका के लिए एक बड़ी कूटनीतिक भूल साबित हो सकती है.
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