‘एक्स्ट्राऑर्डिनेरी…’ ट्रंप ने बांधे पाकिस्तान के PM शरीफ और आर्मी चीफ की तारीफों के पुल, जानें क्या बोले
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल की तारीफ की है. उन्होंने इन दोनों को ‘एक्स्ट्राऑर्डिनेरी मेन’ बताया है.
नई दिल्ली: US के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के तारीफों के पुल बांधे हैं. उन्होंने इस्लामाबाद में US और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता की सफलतापूर्वक मेजबानी को लेकर काफी सराहना की. ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट करते हुए कहा कि दोनों पाकिस्तानी नेताओं को ‘एक्स्ट्राऑर्डिनेरी मेन’ बताया है. साथ ही इस हाई-लेवल मीटिंग को आयोजित करने के लिए धन्यवाद भी दिया.
ट्रंप ने अपने उस दावे को भी दोहराया जिसमें उन्होंने कहा था कि पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच एक बड़े युद्ध को रोकने में पाकिस्तान ने मदद की थी. बता दें कि भारत ने इस दावे को कई बार खारिज किया है, फिर भी ट्रंप ये बोलने से नहीं चूकते हैं.
दोनों देशों ने एक-दूसरे को ठहराया दोषी:
इस्लामाबाद में हुई तीन दिवसीय वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हो गई है. यह कहना गलत नहीं होगा कि दोनों देशों के बीच वार्ता पूरी तरह से फेल हो गई. हर कोई अपनी शर्तों पर अडिग है और एक-दूसरे को झुकाना चाहते हैं. दोनों पक्षों ने इस असफलता के लिए एक दूसरे को दोषी ठहराया.
US के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान ने अपने परमाणु हथियार छोड़ने से इनकार कर दिया. वहीं, ट्रंप ने भी कहा कि ईरान अपने परमाणु हथियार छोड़ने के लिए तैयार नहीं है.” इसके साथ ही कहा कि यह वार्ता मुख्य रूप से ईरान के लिए बुरी खबर थी. दूसरी तरफ ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर गालिबफ ने कहा कि US ईरान का भरोसा जीतने में नाकाम रहा. उन्होंने वॉशिंगटन पर बहुत ज्यादा शर्ते रखने का आरोप भी लगाया. साथ ही बताया कि इस वार्ता के मुख्य मतभेद ईरान के परमाणु प्रोग्राम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर थे.
कमजोर नजर आ रहा है सीजफायर:
सीजफायर US और ईरान के बीच जो दो हफ्तों का सीजफायर किया गया था, वह अब कमजोर नजर आ रहा है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने दोनों पक्षों से संघर्ष विराम बनाए रखने और बातचीत जारी रखने की अपील की है. बता दें कि यह वार्ता इसलिए अहम थी क्योंकि US इजरायल गठबंधन और ईरान के बीच छह सप्ताह तक चले युद्ध के कारण पहले ही हजारों लोगों की जान जा चुकी थी. सिर्फ यही नहीं, इससे बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा था.
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