ईरान समझौते पर ट्रंप की सराहना, रूस पर शिकंजा कसने की तैयारी में जुटा G7
G7 देशों ने यूक्रेन को व्यापक सैन्य सहायता देने, रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और मध्य पूर्व में स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में कई अहम प्रस्ताव रखे हैं. साथ ही अमेरिका-ईरान समझौते का स्वागत करते हुए वैश्विक व्यापार पर जोर दिया गया.
दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के समूह G7 ने वैश्विक सुरक्षा और भू-राजनीतिक चुनौतियों को लेकर एक महत्वपूर्ण संयुक्त बयान जारी किया है. इस घोषणा में यूक्रेन को सैन्य सहायता बढ़ाने से लेकर रूस पर आर्थिक दबाव तेज करने और मध्य पूर्व में ऊर्जा आपूर्ति के मार्गों को सुरक्षित बनाने तक कई अहम मुद्दों को शामिल किया गया है. नेताओं ने संकेत दिया कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में सुरक्षा और ऊर्जा दोनों एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं.
संयुक्त बयान में G7 देशों ने यूक्रेन को मजबूत सैन्य सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई. समूह ने कहा कि यूक्रेन को उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम, इंटरसेप्टर मिसाइलें और लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम सैन्य क्षमताएं उपलब्ध कराई जाएंगी. नेताओं का मानना है कि युद्ध के मैदान में परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और ऐसे समय में यूक्रेन की रक्षा क्षमता को और मजबूत करना आवश्यक है.
G7 देशों ने जारी किया संय़ुक्त बयान
G7 देशों की ओर से यूक्रेन के भीतर रक्षा उत्पादन बढ़ाने के लिए आधुनिक सैन्य निर्माण तकनीकों और लाइसेंस प्रक्रियाओं को आसान बनाने की दिशा में भी सहयोग का आश्वासन दिया गया. G7 का मानना है कि स्थानीय स्तर पर सैन्य उत्पादन बढ़ने से यूक्रेन की दीर्घकालिक सुरक्षा मजबूत होगी. जी7 देशों ने रूस के ऊर्जा क्षेत्र को लक्ष्य बनाते हुए तेल और गैस से जुड़े प्रतिबंधों को और सख्त करने का संकेत दिया है.
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नेताओं का कहना है कि रूस की युद्ध क्षमता को कमजोर करने के लिए उसकी ऊर्जा आय को सीमित करना जरूरी है. हालांकि बयान में यह भी स्वीकार किया गया कि यूरोप के लिए रूस से ऊर्जा आपूर्ति को पूरी तरह समाप्त करना आसान नहीं है. यही कारण है कि मध्य पूर्व से होने वाली तेल आपूर्ति की स्थिरता को इस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है.
अमेरिका-ईरान समझौते का स्वागत
G7 ने स्पष्ट किया कि ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना रूस पर व्यापक आर्थिक दबाव बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. संयुक्त बयान में अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौते का स्वागत किया गया. G7 नेताओं ने इसे परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने की दिशा में एक सकारात्मक अवसर बताया.
उनका मानना है कि संवाद और कूटनीति के माध्यम से क्षेत्रीय तनाव कम किए जा सकते हैं और वैश्विक स्थिरता को मजबूती मिल सकती है. G7 ने कहा कि होर्मुज से निर्बाध समुद्री आवाजाही वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. इसी उद्देश्य से फ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व में एक स्वतंत्र रक्षात्मक समुद्री पहल का समर्थन किया गया है. इस प्रस्तावित नौसैनिक सहयोग का मुख्य उद्देश्य वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और समुद्री मार्गों में मौजूद खतरों, विशेषकर समुद्र में बिछाई गई माइंस को हटाने की प्रक्रिया को मजबूत बनाना है.