क्या युद्ध की ओर बढ़ रहा पश्चिम एशिया? ट्रंप ने ईरान को दिया 15 दिनों का अल्टीमेटम; तेहरान-मॉस्को ने किया संयुक्त नौसैनिक युद्धाभ्यास
ट्रंप ने ईरान को न्यूक्लियर डील के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है. इस बीच ईरान और रूस ने संयुक्त नौसैनिक युद्धाभ्यास की है. US ने इस इलाके में अपने एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात किए हैं.
नई दिल्ली: वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और रूस ने ओमान की खाड़ी और हिंद महासागर में जॉइंट नेवल एक्सरसाइज करके अपनी मिलिट्री पार्टनरशिप दिखाई. ये एक्सरसाइज ऐसे समय में हुई जब US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को न्यूक्लियर डील करने के लिए 15 दिन का कड़ा अल्टीमेटम दिया.
ईरानी आर्मी, IRGC और रशियन नेवी ने 'मैरीटाइम सिक्योरिटी बेल्ट 2026' के तहत स्ट्रेटेजिक पानी में एक्सरसाइज की. इसमें बंधक जहाजों को छुड़ाने और एंटी-पायरेसी ऑपरेशन की प्रैक्टिस की गई, जिसे US की बढ़ती मिलिट्री मौजूदगी के जवाब के तौर पर देखा गया.
कितने दिन का दिया अल्टीमेटम?
प्रेसिडेंट ट्रंप ने एयर फोर्स वन में रिपोर्टर्स को बताया कि ईरान के पास न्यूक्लियर डील करने के लिए ज्यादा से ज्यादा 10 से 15 दिन हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस टाइमफ्रेम में कोई काम का एग्रीमेंट नहीं हुआ, तो ईरान के लिए हालात बहुत बुरे हो सकते हैं और US अगला कदम उठा सकता है.
प्रेशर बढ़ाने के लिए US ने क्या किया?
US ने प्रेशर बढ़ाने के लिए इस इलाके में अपनी सेना तैनात कर दी है. USS अब्राहम लिंकन पहले से ही अरब सागर में तैनात है और दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर, USS गेराल्ड आर. फोर्ड भी वेस्ट एशिया की ओर बढ़ रहा है.
रूस ने क्या दी चेतावनी?
रूस ने चेतावनी दी है कि वह ईरान पर किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा, जबकि ईरान के सुप्रीम लीडर, अयातुल्ला अली खामेनेई ने बाहरी हमले का कड़ा जवाब देने की अपील की है.
क्या चाहता है अमेरिका?
अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित या समाप्त करे, क्योंकि उसे हथियार प्रसार का खतरा मानता है जबकि ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका कार्यक्रम केवल ऊर्जा और वैज्ञानिक शोध के लिए है. तेहरान ने यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह छोड़ने की मांग को संप्रभु अधिकार का उल्लंघन बताया है. यही मुद्दा वार्ता में सबसे बड़ा अवरोध बना हुआ है.
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम अपने सैनिकों और सहयोगियों की सुरक्षा तथा प्रतिरोध क्षमता मजबूत करने के लिए है. इस सैन्य जमावड़े ने तनाव को और बढ़ा दिया है.