क्या यूरोप से हटेगी अमेरिकी सेना? ईरान और होर्मुज को लेकर NATO में विवाद गहराने की वजह से ट्रंप कर रहे विचार

डोनाल्ड ट्रंप यूरोप से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने पर विचार कर रहे हैं. NATO के साथ बढ़ते मतभेद, ईरान संकट और ग्रीनलैंड विवाद इसकी मुख्य वजह हैं. हालांकि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है.

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Km Jaya

नई दिल्ली: व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार ट्रंप यूरोप से कुछ अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने पर विचार कर रहे हैं. वह ईरान संघर्ष पर NATO सहयोगियों की प्रतिक्रिया और ग्रीनलैंड को लेकर अपनी रुकी हुई महत्वाकांक्षाओं से निराश हैं. 

एक अधिकारी ने बताया कि ट्रंप NATO सहयोगियों द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में मदद न करने से नाराज हैं और ग्रीनलैंड को हासिल करने की उनकी योजनाएं आगे न बढ़ने से भी गुस्से में हैं. उन्होंने अपने सलाहकारों के साथ इस महाद्वीप से सैनिकों को हटाने के विकल्प पर चर्चा की है.

क्या लिया गया है फैसला?

अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है और व्हाइट हाउस ने पेंटागन से सैनिकों की वापसी की ठोस योजनाएं तैयार करने के लिए नहीं कहा है. फिर भी केवल इन आंतरिक चर्चाओं से ही वाशिंगटन और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच संबंधों में आई भारी गिरावट का संकेत मिलता है.

कब उठा ये मुद्दा?

यह मुद्दा तब सामने आया जब इस सप्ताह NATO के महासचिव मार्क रूटे व्हाइट हाउस के दौरे पर थे. ऐसा लगता है कि इस बैठक से संबंधों को सुधारने में कोई खास मदद नहीं मिली है. अधिकारी अब इन संबंधों को 1949 में इस गठबंधन की स्थापना के बाद से अब तक के सबसे तनावपूर्ण संबंधों में से एक बता रहे हैं.

कितने सैनिक हैं तैनात?

अमेरिका के इस समय पूरे यूरोप में 80,000 से ज्यादा सैनिक तैनात हैं, जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद से इस महाद्वीप की सुरक्षा व्यवस्था की रीढ़ बने हुए हैं. जर्मनी में सबसे ज्यादा सैनिक तैनात हैं. 30,000 से ज्यादा और इसके अलावा इटली, यूनाइटेड किंगडम और स्पेन में भी बड़ी संख्या में सैनिक तैनात हैं.

ट्रंप क्यों हैं नाराज?

ट्रंप की नाराज़गी पिछले कई महीनों से बढ़ती जा रही है. वह लंबे समय से यूरोपीय सहयोगियों पर रक्षा क्षेत्र में कम निवेश करने का आरोप लगाते रहे हैं लेकिन ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से तनाव काफी बढ़ गया है. राष्ट्रपति ने इस बात पर गुस्सा जाहिर किया है कि NATO देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में मदद के लिए आगे कदम नहीं बढ़ाया. यह एक महत्वपूर्ण वैश्विक ऊर्जा मार्ग है जो एक कमजोर युद्धविराम के बावजूद काफी हद तक बाधित रहा है.

इसके साथ ही ग्रीनलैंड जो डेनमार्क का एक क्षेत्र है वहां पर अपना नियंत्रण स्थापित करने के उनके नए प्रयासों ने अटलांटिक पार के संबंधों में और तनाव पैदा कर दिया है, जिससे यूरोपीय राजधानियों में चिंता बढ़ गई है.

NATO के राजनयिकों का क्या है कहना?

हालांकि NATO के राजनयिकों का कहना है कि अमेरिका ने यह साफ तौर पर नहीं बताया है कि वह होर्मुज अभियानों में अपने सहयोगियों से किस तरह की भूमिका निभाने की उम्मीद करता है या प्रत्येक देश को अपनी कौन सी क्षमताएं उपलब्ध करानी चाहिए.