US Israel Iran War

ट्रंप-नेतन्याहू ने की 3 घंटे लंबी मीटिंग, नहीं हुआ कोई फैसला; ईरान को लेकर क्या बात हुई?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तीन घंटे लंबी बैठक में कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ. दोनों ने ईरान के साथ बातचीत जारी रखने पर जोर दिया. ट्रंप ने कहा कि अगर समझौता नहीं हुआ तो नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं.

ani
Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: बुधवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच करीब तीन घंटे तक चली महत्वपूर्ण बैठक खत्म हो गई, लेकिन कोई बड़ा फैसला सामने नहीं आया. बैठक का मुख्य फोकस ईरान के परमाणु कार्यक्रम, गाजा युद्ध और मध्य पूर्व की बढ़ती अस्थिरता पर रहा.

ट्रंप ने बैठक के बाद सोशल मीडिया पर लिखा कि बातचीत अच्छी रही, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला. उन्होंने साफ कहा कि ईरान के साथ बातचीत का रास्ता अभी खुला रखा जाएगा. दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा पर करीबी समन्वय बनाए रखने की बात कही, लेकिन ईरान पर कोई नया कदम तय नहीं हुआ.

बैठक का मुख्य मुद्दा- ईरान पर दबाव

ट्रंप ने बैठक के बाद ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि उन्होंने ईरान के साथ बातचीत जारी रखने की वकालत की. उनका कहना था कि अगर कोई समझौता संभव हुआ तो अच्छा, वरना स्थिति देखी जाएगी. उन्होंने जून 2025 में अमेरिका द्वारा ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों पर 'मिडनाइट हैमर' ऑपरेशन के तहत किए गए हमलों का जिक्र किया और चेतावनी दी कि अगर ईरान समझदारी नहीं दिखाता तो फिर से ऐसे नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं. ट्रंप ने उम्मीद जताई कि इस बार तेहरान ज्यादा जिम्मेदारी दिखाएगा.

ट्रंप का बयान: अच्छी बातचीत, लेकिन बेनतीजा

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि बैठक में कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ. उन्होंने लिखा, 'बातचीत बहुत अच्छी रही, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला. सिर्फ इतना तय हुआ कि ईरान के साथ बातचीत जारी रहेगी.' उन्होंने यह भी नहीं बताया कि नेतन्याहू उनकी इस राय से पूरी तरह सहमत थे या नहीं. ट्रंप ने बैठक में गाजा युद्ध और पूरे मध्य पूर्व के हालात पर भी चर्चा होने की बात कही, लेकिन इन मुद्दों पर कोई प्रगति या नया कदम सार्वजनिक नहीं किया गया है.

'इजरायल की सुरक्षा सर्वोपरि'

नेतन्याहू के कार्यालय ने अलग बयान जारी कर बताया कि प्रधानमंत्री ने बैठक में इजरायल की सुरक्षा जरूरतों को सबसे ऊपर रखा. दोनों नेताओं ने करीबी समन्वय और लगातार संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई है. बयान में ईरान, गाजा और क्षेत्रीय चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा होने का जिक्र है, लेकिन किसी ठोस समझौते या समयसीमा का उल्लेख नहीं किया गया. इजरायल ने हमेशा ईरान के परमाणु खतरे को अपनी सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती माना है.

आगे क्या हो सकता है?

यह बैठक ऐसे समय में हुई जब ईरान का परमाणु कार्यक्रम फिर से अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बना हुआ है और गाजा में युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा. ट्रंप की वापसी के बाद अमेरिका ने ईरान पर सख्त रुख अपनाया है. दोनों देशों के बीच पिछले कुछ महीनों में कई उच्च-स्तरीय बातचीत हो चुकी हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बातचीत से कोई हल नहीं निकला तो क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है. अगले हफ्तों में दोनों नेताओं के बीच फिर संपर्क होने की संभावना है.