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अमेरिका में 1.5 लाख प्रवासी भारतीय ट्रक ड्राइवरों पर मंडराया संकट, सनकी ट्रंप ने कर दिया ये ऐलान

रिपोर्टों के अनुसार, मार्च में लगभग दो लाख प्रवासी ड्राइवरों के लाइसेंस रद्द किए गए, जिन्हें पहले अमेरिका में रहने और काम करने की अनुमति प्राप्त थी.

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Sagar Bhardwaj

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रवासी ट्रक ड्राइवरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का संकेत देते हुए कहा है कि उनकी सरकार जल्द ही ऐसे ड्राइवरों के खिलाफ "ऐतिहासिक कदम" उठाएगी. पेनसिल्वेनिया में आयोजित एक सैन्य निवेश सम्मेलन में ट्रंप ने आरोप लगाया कि कई प्रवासी ट्रक चालक अवैध रूप से अमेरिका में आए हैं, उनके पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं और वे सड़क सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं. उन्होंने दावा किया कि इनमें से कई ड्रग्स और शराब के प्रभाव में वाहन चलाते हैं.

 पूर्व सैनिकों को मिलेगा मौका

ट्रंप ने कहा कि उनकी योजना प्रवासी ट्रक चालकों की जगह अमेरिकी सैन्य पूर्व सैनिकों को ट्रक ड्राइवर के रूप में तैयार करने की है. उन्होंने घोषणा की कि सेना में भारी वाहन चला चुके सैनिकों को सीधे कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस (CDL) के लिए पात्र बनाया जाएगा. हालांकि, इस प्रस्ताव को लागू करने की प्रक्रिया और समयसीमा पर फिलहाल कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है.

ट्रकिंग में क्यों बढ़ी प्रवासियों की हिस्सेदारी

हाल के वर्षों में अमेरिका में ट्रक ड्राइवरों की कमी के कारण यह पेशा बड़ी संख्या में प्रवासियों के लिए रोजगार का प्रमुख माध्यम बना. बेहतर आय और रोजगार के अवसरों ने कानूनी तथा अवैध दोनों तरह के प्रवासियों को इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. रिपोर्टों के अनुसार, मार्च में लगभग दो लाख प्रवासी ड्राइवरों के लाइसेंस रद्द किए गए, जिन्हें पहले अमेरिका में रहने और काम करने की अनुमति प्राप्त थी.


भारतीयों पर असर: 1.5 लाख ड्राइवर प्रभावित हो सकते हैं

यदि ट्रंप का प्रस्ताव लागू होता है तो इसका सबसे बड़ा असर भारतीय समुदाय, विशेषकर पंजाब और हरियाणा के ट्रक ड्राइवरों पर पड़ सकता है. नॉर्थ अमेरिकन पंजाबी ट्रकर्स एसोसिएशन के अनुसार अमेरिका में करीब 1.30 से 1.50 लाख भारतीय मूल के ट्रक चालक कार्यरत हैं. हाल के वर्षों में अंग्रेजी दक्षता नियम, नए लाइसेंस संबंधी प्रतिबंध और कुछ चर्चित सड़क दुर्घटनाओं तथा ड्रग तस्करी के मामलों के कारण भारतीय ट्रक चालकों पर पहले से ही दबाव बढ़ा है. हालांकि, ट्रंप की यह योजना अभी केवल प्रस्ताव है और इसे लागू करने के लिए आधिकारिक नीति, कानूनी प्रक्रिया और प्रशासनिक मंजूरी बाकी है.