ईरान को अमेरिकी बेस की तस्वीरें देने वाला चीनी सैटेलाइट अचानक टूटा, 43 मलबे के टुकड़ों से मचा हड़कंप
जुलाई 2026 में ईरान के अमेरिकी बेस पर हमले से पहले चीनी सैटेलाइट तस्वीरें मिलने की रिपोर्ट सामने आई. करीब छह हफ्ते बाद याओगन-50 सैटेलाइट कक्षा में टूट गया, जिससे सवाल उठे.
नई दिल्ली अमेरिका-चीन के बीच बढ़ती तकनीकी और सैन्य प्रतिस्पर्धा के बीच अंतरिक्ष से जुड़ी एक घटना ने नई चर्चा छेड़ दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान को अमेरिकी बेस की हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरें उपलब्ध कराई गई थीं. इसके कुछ सप्ताह बाद चीन का याओगन-50 (02) सैटेलाइट अचानक कक्षा में टूट गया.
अमेरिकी बेस की तस्वीरों को लेकर बड़ा दावा
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2026 में जॉर्डन के मुवफ्फाक साल्ती एयर बेस पर ईरानी मिसाइल हमले से पहले तेहरान को चीन से बेस की हाई-रेजोल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरें मिली थीं. हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए. अमेरिकी अधिकारियों ने इसे चीनी सहायता से जुड़ा अहम सबूत बताया है. हालांकि चीन के दूतावास ने आरोपों से इनकार किया है.
छह हफ्ते बाद अंतरिक्ष में टूटा सैटेलाइट
हमले के करीब छह सप्ताह बाद चीन का याओगन-50 (02) सैटेलाइट अंतरिक्ष में टूट गया. इसे मार्च 2026 में लॉन्च किया गया था और यह एक असामान्य रेट्रोग्रेड ऑर्बिट में काम कर रहा था. अमेरिकी स्पेस फोर्स ने इसके टूटने के बाद कम से कम 43 मलबे के टुकड़ों को ट्रैक किया. ये टुकड़े 600 से 1100 किलोमीटर की ऊंचाई पर फैले हैं और लंबे समय तक कक्षा में बने रह सकते हैं.
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टूटने की वजह अभी साफ नहीं
सैटेलाइट के अचानक टूटने का आधिकारिक कारण अभी सामने नहीं आया है. विशेषज्ञों ने प्रोपल्शन सिस्टम या बैटरी में खराबी समेत किसी दूसरे मलबे से टकराने जैसी संभावनाएं जताई हैं. चीन ने भी इस घटना पर कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है. याओगन श्रृंखला के सैटेलाइटों को आम तौर पर निगरानी से जोड़ा जाता है, जबकि चीन इन्हें नागरिक उद्देश्यों, जैसे भूमि सर्वेक्षण, के लिए इस्तेमाल होने वाला बताता है.
संयोग या बढ़ते अंतरिक्ष तनाव का संकेत?
ईरान को चीनी इमेजरी मिलने और कुछ सप्ताह बाद याओगन-50 के टूटने के बीच कोई आधिकारिक संबंध सामने नहीं आया है. यह भी कोई नहीं कह रहा कि सैटेलाइट को जानबूझकर निशाना बनाया गया. इसलिए इसे तकनीकी खराबी या संयोग मानने की संभावना भी बनी हुई है. फिर भी अमेरिका-चीन तनाव के बीच यह घटनाक्रम अंतरिक्ष सुरक्षा, सैटेलाइट डेटा और बढ़ते मलबे को लेकर चिंता बढ़ाता है. आधुनिक युद्ध में खुफिया तस्वीरों की भूमिका बढ़ने के साथ अंतरिक्ष अब भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का अहम क्षेत्र बन चुका है.