उत्तराखंड के 18 हजार शिक्षकों को TET से राहत की उम्मीद, अनिल बलूनी संसद में उठाएंगे मुद्दा

गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने उत्तराखंड के बेसिक शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से राहत दिलाने की पहल की है.

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Ashutosh Rai

उत्तराखंड के करीब 18 हजार बेसिक शिक्षकों के लिए TET का मुद्दा फिर सामने आया है. राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने सांसद अनिल बलूनी से मुलाकात कर अपनी चिंता बताई. शिक्षकों का कहना है कि वर्षों की सेवा के बाद दोबारा पात्रता परीक्षा की शर्त उनके लिए मुश्किल है.

1 सितंबर 2028 तक TET अनिवार्य

शिक्षक संघ ने सांसद को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के एक सितंबर 2025 के आदेश के बाद आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है. आदेश के अनुसार एक अप्रैल 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी तय समय में TET पास करना होगा. 55 साल से अधिक उम्र के शिक्षकों को सेवा में बने रहने की छूट है लेकिन TET पास नहीं करने पर पदोन्नति का लाभ नहीं मिलेगा. एक सितंबर 2028 तक परीक्षा पास नहीं करने वाले शिक्षकों की सेवा पर भी संकट आ सकता है. शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने 25 से 30 साल तक सरकारी नियमों के तहत सेवा दी है.

25 लाख शिक्षकों का भविष्य प्रभावित

शिक्षक संघ के अनुसार इस आदेश का असर उत्तराखंड के करीब 18 हजार बेसिक शिक्षकों के अलावा देशभर के लगभग 25 लाख शिक्षकों पर पड़ सकता है. संघ का तर्क है कि इन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय लागू नियमों के आधार पर हुई थी, जब TET की यह शर्त लागू नहीं थी. आरटीई अधिनियम एक अप्रैल 2010 से लागू हुआ था. वहीं NCTE ने इसके प्रावधानों को 23 अगस्त 2010 को अधिसूचित किया. ऐसे में शिक्षकों का कहना है कि बाद में लागू हुई पात्रता परीक्षा की शर्त को पुराने कर्मचारियों पर लागू करना उचित नहीं है. प्रतिनिधिमंडल ने इसी आधार पर राहत की मांग सांसद के सामने रखी.


केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मिलेंगे बलूनी

प्रतिनिधिमंडल की बात सुनने के बाद अनिल बलूनी ने शिक्षकों की मांग को जायज बताया और आगामी संसद सत्र में इस मुद्दे को उठाने का आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि वह केंद्रीय शिक्षा मंत्री से भी मुलाकात करेंगे और समस्या का समाधान निकालने की कोशिश करेंगे. बलूनी ने भरोसा दिलाया कि प्रयास केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देशभर में प्रभावित शिक्षकों को राहत दिलाने की कोशिश की जाएगी. प्रतिनिधिमंडल में पौड़ी गढ़वाल जिलाध्यक्ष मनोज जुगरान, हरिद्वार जिलाध्यक्ष अश्वनी चौहान, दीपक सजवाण, राजेंद्र ढौंडियाल और सुमित चौहान समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे.