कैसे Zombie के सहारे चला रहा था दुनिया का साइबर क्राइम, पकड़ा गया चीनी मास्टरमाइंड
Zombie Botnet Cybercrime: अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन की टीम ने साइबर अपराध में शामिल एक विशाल बॉटनेट को नष्ट कर दिया. इस बॉटनेट का संचासन चीनी नागरिक करता था,जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है.
Zombie Cybercrime: अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन की टीम ने साइबर अपराधों को लेकर एक बड़ी सफलता हासिल की है. टीम ने साइबर अपराधों के मास्टरमाइंड चीनी नागरिक को गिरफ्तार किया है. इस दौरान टीम ने एक विशाल बॉटनेट को भी नष्ट कर दिया है. मास्टरमाइंड इस बॉटनेट के जरिए सालों से लोगों की खुफिया जानकारी चुरा रहा था और तमाम तरह के गैर-कानूनी काम कर रहा था. बॉटनेट संक्रमित कंप्यूटरों का एक बड़ा नेटवर्क है जोकि हमलावर के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए मिलकर काम करता है.इस नेटवर्क सिस्टम को जॉम्बी कंप्यूटर कहा जाता है.
200 देशों में फैला जॉम्बी नेटवर्क
रिपोर्ट के मुताबिक, नष्ट किए गए बॉटनेट का नाम 911 S 5 है.इस बॉटनेट का इस्तेमाल चीनी मास्टरमाइंड यून्हे वैंग करता था. यह बॉटनेट लगभग दस सालों से काम कर रहा था. इसके जरिए वैंग ने लोगों की जानकारियां चुराई,वित्तीय धोखाड़ी और चाइल्ड ट्रैफिकिंग जैसे गैर-कानूनी गतिविधियों को अंजाम दिया. चीनी नागरिक ने बॉटनेट की मदद से लगभग 200 देशों में लाखों कंप्यूटरों को संक्रमित किया.
दुनियाभर के देशों ने किया सहयोग
चीनी नागरिक और बॉटनेट तक पहुंचने के लिए दुनियाभर के तमाम देशों ने सहयोग किया. इसकी मदद से दुनियाभर में बढ़ रहे साइबर अपराध को काउंटर करने में बड़ी सहूलियत होगी. अमेरिकी न्याय विभाग और FBI ने इस ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इस कारण लाखों क्रिप्टोकरेंसी और लग्जरी संपत्तियों सहित महत्वपूर्ण संपत्तियों को जब्ती हुई है.
क्या है 911 S 5 ?
अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई के निदेशक क्रिस्टोफर व्रे के अनुसार, 911 S 5 एक विशाल मालवेयर संक्रमित कंप्यूटर नेटवर्क है. यह नेटवर्क 200 देशों में फैला हुआ है. इसने वित्तीय धोखाधड़ी की,बाल शोषण सामग्री और साइबर अपराधों को बढ़ावा दिया. इस बॉटनेट का संचालन चीनी नागरिक यून्हे वैंग नाम का शख्स करता था. एजेंसी ने इसे सिंगापुर से गिरफ्तार कर लिया है. बॉटनेट ने लोगों के कंप्यूटर को मैलवेयर से संक्रमित करके जॉम्बी मशीनों में बदल दिया. इसके बाद इन कंप्यूटर्स को कहीं से भी संचालित किया जा सकता था. साइबर अपराधियों ने इनका इस्तेमाल अवैध गतिविधियों के लिए किया.