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‘दूसरे हमारे मामलों में दखल न दें…’ होर्मुज को ब्लॉक करने पर चीन ने दे डाली अमेरिका को कड़ी चेतावनी

अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य की नौसैनिक नाकेबंदी लगा दी है, जिससे चीन काफी नाराज नजर आ रहा है. चीन ने इस मामले को लेकर चीन को कड़ी चेतावनी दी है.

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Shilpa Srivastava

नई दिल्ली: अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य की नौसैनिक नाकेबंदी शुरू कर दी है, जिसके बाद, चीन ने अमेरिका को कड़े शब्दों में चेतावनी दे दी है. चीन ने कहा है कि वह ईरान के साथ उसके व्यापार और ऊर्जा संबंधों में दखल न दे. चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने कहा था कि चीन ईरान के साथ अपने समझौतों का पालन करता रहेगा. उन्होंने यह साफ कर दिया कि अमेरिकी नाकेबंदी के बावजूद चीनी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते रहेंगे.

डोंग जून ने कहा, "हमारे जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के जलक्षेत्र में आ-जा रहे हैं. ईरान के साथ हमारे व्यापार और ऊर्जा समझौते हैं. हम उन समझौतों का सम्मान और पालन करेंगे और उम्मीद करते हैं कि दूसरे हमारे मामलों में दखल नहीं देंगे."

चीन जा रहे दो टैंकरों को लौटना पड़ा वापस:

बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य चीन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. चीन का लगभग 40% तेल और 30% लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) इसी रास्ते से आता है. चीन की तरफ से यह चेतावनी तब सामने आई है जब सोमवार को अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों में आने या वहां से जाने वाले सभी जहाजों को रोकना शुरू कर दिया. समुद्री ट्रैकिंग डाटा के अनुसार, चीन जा रहे करीब दो ऑयल और कैमिकल्स टैंकरों को वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ा.

ट्रंप ने ईरान को दी चेतावनी:

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस नाकेबंदी की घोषणा की. साथ ही ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिकी जहाजों के करीब आने वाली किसी भी ईरानी नाव को नष्ट कर दिया जाएगा. इसके साथ ही कहा कि यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि ईरान संघर्ष-विराम समझौते का पूरी तरह से पालन नहीं कर रहा था.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि यह नाकेबांद उन सभी जहाजों पर लागू होगी, जो ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन जो जहाज केवल दूसरे देशों की ओर जाने के लिए इस जलडमरूमध्य से गुजर रहे हैं, उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी.

इस पूरे मामले को लेकर चीन की कड़ी प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि वह ईरान से अपनी एनर्जी सप्लाई पर किसी भी तरह की रोक को आसानी से स्वीकार नहीं करेगा. खाड़ी क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, और कई देशों को चिंता है कि इस संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है.