'पाकिस्तान नहीं, ये देश निकला अमेरिका-ईरान सीजफायर के पीछे का असली मास्टरमाइंड'; US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ दो सप्ताह के सीजफायर में पाकिस्तान से ज्यादा चीन की भूमिका रही. चीन ने पर्दे के पीछे बैकडोर डिप्लोमेसी कर ईरान को समझाया.
नई दिल्ली: अमेरिका-ईरान युद्धविराम के पीछे पाकिस्तान की भूमिका पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही थी, लेकिन अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा किया है. ट्रंप का कहना है कि असल सूत्रधार चीन था. चीन ने सामने आने के बजाय पर्दे के पीछे काम किया और ईरान को सीजफायर के लिए राजी किया. इस खुलासे ने पूरी कूटनीतिक तस्वीर बदल दी है. चीन ने पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देशों के माध्यम से बैकडोर डिप्लोमेसी चलाई.
उसने ईरान को समझाया कि लंबा युद्ध क्षेत्र और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है. हालांकि चीन ने सार्वजनिक रूप से अपनी इस भूमिका को स्वीकार नहीं किया है. अब सवाल यह है कि क्या यह सीजफायर स्थायी शांति की ओर ले जाएगा.
ट्रंप का चीन पर बड़ा दावा
ट्रंप ने खुद स्वीकार किया कि चीन की पहल के बिना यह सीजफायर संभव नहीं था. उन्होंने कहा कि चीन ने ईरान को बातचीत के लिए मनाया. पाकिस्तान के माध्यम से जो अनुरोध आया, उसके पीछे भी चीन की रणनीति काम कर रही थी.
चीन की बैकडोर डिप्लोमेसी
चीन ने सामने आने के बजाय मध्यस्थ देशों के जरिए ईरान तक संदेश पहुंचाए. उसका फोकस यह था कि युद्ध न सिर्फ मध्य पूर्व बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी खतरनाक है. चीनी विदेश मंत्रालय ने बस इतना कहा कि सभी पक्ष ईमानदारी से काम करें.
UN में चीन-रूस का वीटो
सीजफायर से पहले चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा संबंधी प्रस्ताव को वीटो कर दिया. अमेरिका ने इसकी कड़ी आलोचना की, लेकिन विश्लेषक मानते हैं कि चीन दोहरी रणनीति अपना रहा था.
पाकिस्तान सिर्फ मध्यस्थ बना
पाकिस्तान ने सीजफायर कराने का श्रेय लिया था, लेकिन ट्रंप के बयान के बाद साफ हो गया कि असली खेल चीन के हाथ में था. इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत में पाकिस्तान को सिर्फ एक चेहरा बनाकर इस्तेमाल किया गया.
आगे क्या होगा?
दो हफ्ते का यह सीजफायर अस्थायी है. अगर चीन की कूटनीति आगे भी जारी रही तो स्थायी शांति की उम्मीद बढ़ सकती है. फिलहाल साफ है कि इस जंग में सैन्य ताकत के साथ-साथ कूटनीति ने भी अहम भूमिका निभाई है.
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