चीन ने महंगे कर दिए कंडोम, जानें ड्रैगन को क्यों उठाया पड़ा ये कदम
सरकार ने कंडोम पर 13 प्रतिशत वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) लगा दिया है. इस फैसले को लोग अनौपचारिक रूप से “कंडोम टैक्स” कह रहे हैं.
चीन ने साल 2026 की शुरुआत एक अलग फैसले के साथ की है. 1 जनवरी से देश में गर्भनिरोधक साधनों, खासकर कंडोम की कीमतें बढ़ा दी गई हैं. सरकार ने इन पर 13 प्रतिशत वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) लगा दिया है. इस फैसले को लोग अनौपचारिक रूप से “कंडोम टैक्स” कह रहे हैं. सरकार का कहना है कि इसका मकसद लोगों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करना है.
वन चाइल्ड पॉलिसी की विरासत
चीन में साल 1980 से 2015 तक सख्त वन चाइल्ड पॉलिसी लागू रही. इस नीति के तहत एक से ज्यादा बच्चे पैदा करने पर परिवारों पर जुर्माना लगाया जाता था और कई बार जबरन नसबंदी जैसे कदम भी उठाए गए. उस समय यह नीति बढ़ती आबादी को रोकने में मददगार रही, लेकिन लंबे समय में इसके गंभीर नतीजे सामने आए. आज चीन तेजी से बूढ़ी होती आबादी और घटती जन्म दर की समस्या से जूझ रहा है.
बच्चे क्यों नहीं पैदा कर रहे चीनी लोग
1 जनवरी 2016 से चीन ने दो बच्चों की अनुमति दी और 2021 में इसे बढ़ाकर तीन बच्चे कर दिया गया. इसके बावजूद हालात नहीं बदले. इसकी सबसे बड़ी वजह महंगाई और जीवनयापन की ऊंची लागत मानी जा रही है.
बीजिंग स्थित यूवा पॉपुलेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, चीन उन देशों में शामिल है जहां बच्चे की परवरिश सबसे महंगी है. महंगे स्कूल, कड़ी शिक्षा प्रतिस्पर्धा और कामकाजी महिलाओं पर दोहरी जिम्मेदारी लोगों को बच्चे पैदा करने से रोक रही है.
लगातार घट रही है आबादी
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, चीन की आबादी लगातार तीन साल से घट रही है. साल 2024 में देश में सिर्फ करीब 95.4 लाख बच्चों का जन्म हुआ. यह संख्या सरकार के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गई है.
जन्म दर बढ़ाने के लिए सरकार के प्रयास
कंडोम पर टैक्स लगाना सरकार की कई कोशिशों में से एक है. इसके अलावा चाइल्डकेयर सेवाओं को टैक्स से छूट दी गई है. तीन साल से कम उम्र के हर बच्चे पर सरकार सालाना 3,600 युआन (करीब 45 हजार रुपये) की सब्सिडी दे रही है. कई स्थानीय सरकारें बच्चों की शिक्षा को सस्ती या मुफ्त बनाने के कदम भी उठा रही हैं.