ग्लोबल ट्रेड टेंशन के बीच कनाडा के पीएम मार्क कार्नी करेंगे पहली भारत यात्रा, PM मोदी से मुलाकात पर दुनिया की नजर, जानें पूरा शेड्यूल
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी 26 फरवरी से 7 मार्च 2026 तक भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान की यात्रा करेंगे. मुंबई और नई दिल्ली में उनकी बैठकों का केंद्र व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा, तकनीक और रणनीतिक सहयोग रहेगा.
नई दिल्ली: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी इस महीने भारत की आधिकारिक यात्रा पर आ रहे हैं. यह उनका प्रधानमंत्री बनने के बाद पहला भारत दौरा होगा. 26 फरवरी से 7 मार्च 2026 तक चलने वाले तीन देशों के इंडो-पैसिफिक दौरे में भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया और जापान भी शामिल हैं. यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रहे हैं और देश नए साझेदारी विकल्प तलाश रहे हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, कार्नी अपने भारत प्रवास की शुरुआत मुंबई से करेंगे. इसके बाद वे नई दिल्ली पहुंचेंगे. यहां उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रस्तावित है. यह दौरा दोनों देशों के बीच संबंधों को नई दिशा देने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.
किन मुद्दों पर होगी चर्चा
नई दिल्ली में होने वाली वार्ता में व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों पर जोर रहेगा. इसके अलावा प्रतिभा गतिशीलता, सांस्कृतिक सहयोग और रक्षा साझेदारी भी बातचीत के प्रमुख विषय होंगे. दोनों देश आर्थिक सहयोग को व्यापक रूप देने की कोशिश करेंगे.
रिश्तों को नई शुरुआत
हाल के वर्षों में आए कूटनीतिक तनाव के बाद यह यात्रा अहम मानी जा रही है. प्रधानमंत्री बनने के बाद कार्नी की यह पहली भारत यात्रा है. हालांकि, वे जी7 और जी20 शिखर सम्मेलनों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से दो बार मिल चुके हैं. इस बार बातचीत औपचारिक और विस्तृत एजेंडे के साथ होगी.
उद्योग जगत से संवाद
भारत प्रवास के दौरान कार्नी भारतीय उद्योगपतियों से भी मुलाकात करेंगे. उद्देश्य कनाडा में निवेश के अवसरों को रेखांकित करना और दोनों देशों की कंपनियों के बीच साझेदारी बढ़ाना है. कनाडा सरकार का कहना है कि वह अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में काम कर रही है.
भारत के बाद ऑस्ट्रेलिया जाएंगे कार्नी
भारत के बाद कार्नी सिडनी और कैनबरा जाएंगे, जहां उनकी मुलाकात ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से होगी. वहां रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग, महत्वपूर्ण खनिज, व्यापार और उन्नत तकनीक विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर चर्चा की उम्मीद है.
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