गाय के गोबर की खाद में मिले सबसे ज्यादा दवाओं को बेअसर करने वाले बैक्टीरिया, 8वीं के छात्र ने किया चौंकाने वाला प्रयोग

कैलिफोर्निया के आठवीं कक्षा के छात्र विरिंची आर. मदिरेड्डी ने गाय, मुर्गी, मछली और चमगादड़ की खाद में एंटीबायोटिक-रेजिस्टेंट बैक्टीरिया की जांच की. उनके प्रयोग में गाय की खाद में ऐसे बैक्टीरिया की सबसे ज्यादा विविधता मिली.

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Km Jaya

अमेरिका के कैलिफोर्निया में आठवीं कक्षा के एक छात्र ने जैविक खेती और बागवानी से जुड़े एक महत्वपूर्ण सवाल पर प्रयोग किया है. रिपॉन के रहने वाले विरिंची आर. मदिरेड्डी ने गाय, मुर्गी, मछली और चमगादड़ से बनी खाद में ऐसे बैक्टीरिया की तलाश की, जो एंटीबायोटिक के संपर्क में भी जीवित रह सकते हैं. उनके प्रयोग में गाय के गोबर से बनी खाद में एंटीबायोटिक-रेजिस्टेंट बैक्टीरिया की सबसे ज्यादा विविधता मिली.

विरिंची के इस रिसर्च प्रोजेक्ट को 2026 Thermo Fisher Scientific Junior Innovators Challenge के 30 फाइनलिस्ट में जगह मिली है. यह अमेरिका की मिडिल स्कूल स्तर की राष्ट्रीय विज्ञान प्रतियोगिता है. उनके प्रयोग का मुख्य सवाल यह था कि क्या बाजार में मिलने वाली पशु-आधारित खाद में ऐसे बैक्टीरिया मौजूद हो सकते हैं, जो एंटीबायोटिक के खिलाफ प्रतिरोधी हों.

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस क्यों है चिंता का विषय?

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस दुनिया के प्रमुख स्वास्थ्य खतरों में शामिल है. पशुओं में भी बड़ी मात्रा में एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल किया जाता है. इसके कारण कुछ बैक्टीरिया समय के साथ दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित कर सकते हैं. ऐसे बैक्टीरिया पशुओं के मल के जरिए खाद में पहुंच सकते हैं.


जब इस तरह की खाद को मिट्टी या खेतों में डाला जाता है, तो रेजिस्टेंट बैक्टीरिया के मिट्टी और पौधों तक पहुंचने की संभावना पर सवाल उठता है. इसी संभावित रास्ते को समझने के लिए विरिंची ने अलग-अलग पशु-आधारित खाद की तुलना की.

कैसे किया गया प्रयोग?

विरिंची ने गाय की खाद, मुर्गी की खाद, मछली से बनी खाद और चमगादड़ के गुआनो की तुलना सामान्य बगीचे की मिट्टी से की. उन्होंने प्रत्येक नमूने को घोल में मिलाकर ऐसे अगर प्लेट पर फैलाया, जिसमें एंटीबायोटिक एम्पिसिलिन मौजूद था.

एम्पिसिलिन ने एक तरह के फिल्टर का काम किया. जो बैक्टीरिया इस एंटीबायोटिक के प्रति संवेदनशील थे, वे नहीं बढ़ सके, जबकि प्रतिरोधी बैक्टीरिया प्लेट पर कॉलोनी बना सके. इसके बाद दिखाई देने वाली कॉलोनियों से जेनेटिक सामग्री लेकर उनकी सीक्वेंसिंग कराई गई, जिससे मौजूद बैक्टीरिया की पहचान की जा सके.

गाय की खाद में मिली सबसे ज्यादा विविधता

प्रयोग में सामान्य बगीचे की मिट्टी, गाय की खाद और मुर्गी की खाद में एंटीबायोटिक-रेजिस्टेंट बैक्टीरिया पाए गए. वहीं मछली की खाद और चमगादड़ के गुआनो के नमूनों में इस परीक्षण के दौरान ऐसे बैक्टीरिया नहीं मिले.

गाय की खाद सबसे अलग रही, क्योंकि इसमें एंटीबायोटिक-रेजिस्टेंट बैक्टीरिया की सबसे ज्यादा विविधता मिली. इनमें कुछ ऐसे बैक्टीरिया भी थे, जो बीमारी पैदा करने की क्षमता रखते हैं. हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि प्रयोग में केवल एक एंटीबायोटिक का इस्तेमाल हुआ था. इसलिए इसे किसी खास खाद को असुरक्षित घोषित करने वाला अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता.

किसानों और बागवानी करने वालों के लिए क्या मायने?

विरिंची के प्रयोग से यह सवाल सामने आता है कि पशु-आधारित खाद के जरिए एंटीबायोटिक-रेजिस्टेंट बैक्टीरिया मिट्टी और फसलों तक पहुंच सकते हैं या नहीं. हालांकि, इस संबंध में व्यापक निष्कर्ष निकालने के लिए ज्यादा नमूनों, अलग-अलग ब्रांड, कई एंटीबायोटिक्स और अलग-अलग फसलों के साथ बड़े अध्ययन की जरूरत होगी.

युवा वैज्ञानिक विरिंची कैलिफोर्निया कनेक्शंस एकेडमी एट रिपॉन में पढ़ते हैं. वह माइक्रोबायोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं और मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीवों में उनकी खास दिलचस्पी है. 2026 Junior Innovators Challenge के 30 फाइनलिस्ट को 500 डॉलर का पुरस्कार मिलेगा और वे 23 से 28 अक्टूबर तक अमेरिका की राजधानी में होने वाले फाइनल में 1 लाख डॉलर से अधिक के पुरस्कारों के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे.