BRICS में भारत की बड़ी जीत, नई दिल्ली घोषणापत्र पर कुगेलमैन बोले- यह आसान काम नहीं था

दक्षिण एशिया मामलों के अमेरिकी विश्लेषक माइकल कुगेलमैन ने नई दिल्ली घोषणापत्र को भारत की बड़ी कूटनीतिक कामयाबी बताया.

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Ashutosh Rai

BRICS Summit 2026 : 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणापत्र को मंजूरी मिलना भारत के लिए अहम उपलब्धि माना जा रहा है. अमेरिकी विश्लेषक माइकल कुगेलमैन ने कहा कि भारत को अध्यक्षता के दौरान कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा लेकिन शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में साझा घोषणापत्र अपनाना बड़ी सफलता है.

घोषणापत्र मंजूर होना बड़ी उपलब्धि

माइकल कुगेलमैन ने कहा कि नई दिल्ली घोषणापत्र का स्वीकार होना भारत के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है. इसकी वजह यह है कि इसी साल की शुरुआत में विदेश मंत्रियों की ब्रिक्स बैठक में सदस्य देश साझा बयान पर सहमति नहीं बना सके थे. ऐसे में शिखर सम्मेलन में सभी नेताओं का संयुक्त दस्तावेज पर सहमत होना भारत की कूटनीतिक कोशिशों की सफलता दिखाता है. कुगेलमैन के मुताबिक भारत के सामने ईरान में युद्ध और अमेरिका की नीतियों से जुड़े मुद्दों को संभालने जैसी कई चुनौतियां थीं. इसके बावजूद सम्मेलन में साझा रुख सामने आया.

अमेरिकी नीतियों का भी जिक्र

कुगेलमैन ने कहा कि घोषणापत्र का शुरुआती हिस्सा ज्यादा चौंकाने वाला नहीं था. इसमें ब्रिक्स के पुराने और मूल सिद्धांतों को ही दोहराया गया है. हालांकि, दस्तावेज में वैश्विक व्यापार व्यवस्था में आ रही परेशानियों, अमेरिकी टैरिफ और अमेरिकी प्रतिबंधों का जिक्र जरूर महत्वपूर्ण है. उनके अनुसार इन बातों से अमेरिकी प्रशासन में नाराजगी हो सकती है. ब्रिक्स ने संरक्षणवादी नीतियों पर चिंता जताते हुए कहा कि बढ़ती व्यापार पाबंदियां दुनिया की अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ा रही हैं. समूह ने नियम आधारित वैश्विक व्यापार व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया.


WTO सुधार पर ब्रिक्स का जोर

नई दिल्ली घोषणापत्र में ब्रिक्स देशों ने WTO को केंद्र में रखते हुए मजबूत और निष्पक्ष वैश्विक व्यापार व्यवस्था की जरूरत बताई. समूह ने एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों को खत्म करने की मांग भी की. साथ ही बढ़ती कस्टम ड्यूटी, गैर-टैरिफ बाधाओं और व्यापार को रोकने वाली दूसरी नीतियों पर चिंता जताई. ब्रिक्स ने WTO के विवाद निपटान सिस्टम को दोबारा पूरी तरह शुरू करने और नए अपीलीय निकाय सदस्यों की नियुक्ति की मांग की. इसके अलावा ब्रेटन वुड्स संस्थानों में सुधार की जरूरत भी बताई गई. भारत की अध्यक्षता में 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वां ब्रिक्स सम्मेलन हो रहा है.