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बशर अल-असद की कैसी हुई थी ताजपोशी, लंदन में थे आखों के डॉक्टर फिर अचानक बन गए इस्लामिक देश के राष्ट्रपति

Syria Civil War Bashar al-Assad : बशर अल-असद के जाने के बाद सीरिया में एक नए युग की शुरुआत की संभावना है. लेकिन देश के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं. युद्ध के दौरान बर्बाद हुए बुनियादी ढांचे, गहराते आर्थिक संकट और विस्थापित नागरिकों की समस्याओं का समाधान करना आसान नहीं होगा.

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Gyanendra Tiwari

Syria Civil War Bashar al-Assad : सीरिया के राजनीतिक इतिहास में बशर अल-असद का नाम एक ऐसे शख्स के रूप में दर्ज है, जो पेशे से आंखों के डॉक्टर थे. लेकिन सत्ता की बागडोर संभालकर एक तानाशाह बन गए. उनके 24 साल लंबे शासन का अंत हुआ, जो सीरिया के लिए नए युग की शुरुआत का प्रतीक माना जा रहा है. आइए, जानते हैं बशर अल-असद के असाधारण सफर और उनके शासनकाल की पूरी कहानी.

बशर अल-असद का जन्म 11 सितंबर 1965 को दमिश्क, सीरिया में हुआ. उन्होंने मेडिकल फील्ड में करियर बनाने का फैसला किया और आंखों के डॉक्टर के तौर पर लंदन में ट्रेनिंग ली. राजनीति से उनका कोई नाता नहीं था, क्योंकि उनके बड़े भाई बासिल अल-असद को उनके पिता और तत्कालीन राष्ट्रपति हाफ़िज़ अल-असद ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में चुना था.

पिता की मौत के बाद हुई ताजपोशी

1994 में बासिल की एक कार दुर्घटना में मृत्यु हो गई, जिससे बशर के कंधों पर राजनीति में कदम रखने की जिम्मेदारी आ गई. पिता की मृत्यु के बाद 2000 में, बशर को सीरिया का राष्ट्रपति बनाया गया.

सत्ता के लिए बदले गए कानून

जब बशर अल-असद को राष्ट्रपति बनाना तय हुआ, तो उनकी उम्र केवल 34 साल थी. उस समय सीरिया के संविधान में राष्ट्रपति बनने की न्यूनतम उम्र 40 साल थी. संसद ने कानून में बदलाव कर उम्र सीमा घटाकर 34 कर दी, ताकि बशर को सत्ता संभालने में कोई रुकावट न हो. चुनावों में उन्हें 97% वोट मिले, लेकिन ये नतीजे कई सवाल खड़े करते रहे.

सुधार की उम्मीदें और तानाशाही का सफर

शुरुआत में बशर को उनके शांत और रिजर्व स्वभाव के कारण राजनीतिक सुधारों की उम्मीद के साथ देखा गया. लेकिन जल्द ही उनका शासन उनके पिता की तानाशाही की छवि को ही दोहराने लगा. असहमति को दबाने और राजनीतिक बंदियों को जेल में डालने का सिलसिला तेज हो गया.

विद्रोह की शुरुआत

2011 में जब अरब स्प्रिंग की लहर ने मध्य पूर्व को हिला दिया, तो सीरिया भी इससे अछूता नहीं रहा. लोग सड़कों पर उतर आए और लोकतंत्र की मांग करने लगे. लेकिन बशर अल-असद ने इन विरोधों को विदेशी साजिश बताया और प्रदर्शनकारियों को आतंकवादी करार दिया. इसके बाद शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन जल्द ही गृहयुद्ध में बदल गया.

विनाशकारी गृहयुद्ध और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप

गृहयुद्ध ने सीरिया को खंड-खंड कर दिया. बशर सरकार पर रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल, मानवाधिकारों के उल्लंघन और हजारों नागरिकों की हत्या जैसे गंभीर आरोप लगे. रूस और ईरान जैसे देशों के समर्थन ने बशर को लंबे समय तक सत्ता में बनाए रखा.

2018 में रासायनिक हथियार निषेध संगठन ने पुष्टि की कि असद सरकार ने रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया. 2023 में फ्रांस ने उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट जारी किया.

विद्रोहियों का उभार और बशर का पतन

2024 में विद्रोही ताकतों ने तेजी से सीरिया के कई प्रमुख शहरों पर कब्जा कर लिया. दमिश्क पर कब्जे के साथ ही बशर अल-असद को देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह और उनका परिवार रूस में शरण लिए हुए है.  सीरिया के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि यह बदलाव उनके देश को शांति और लोकतंत्र की दिशा में ले जाएगा.

लोकतंत्र की ओर एक नई शुरुआत

सीरिया के नागरिक अब एक ऐसे भविष्य की कल्पना कर रहे हैं, जो संघर्ष और तानाशाही से मुक्त हो. यह बदलाव न केवल सत्ता परिवर्तन का प्रतीक है, बल्कि देश की नई पहचान बनाने का मौका भी है. क्या सीरिया इस मौके का सही उपयोग कर सकेगा, यह आने वाले समय में तय होगा.