बांग्लादेश में 'हसीना युग' का अंत! पूर्व प्रधानमंत्री ने लिया संन्यास? भारत के साथ कैसे सुधरेंगे संबंध
बांग्लादेश में चुनाव होने वाला है. हालांकि उससे पहले एक खबर आई है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने राजनीति से संन्यास ले लिया है. अब ऐसे भारत के साथ संबंध को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है.
नई दिल्ली: बांग्लादेश में चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है. 12 फरवरी को होने वाले चुनाव को लेकर सभी पार्टियां अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर रहे हैं. इसी बीच खबर आ रही है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना अब राजनीति से संन्यास लेने का फैसला ले चुकी है. इस बात की जानकारी खुद उनके बेटे और आईटी सलाहकार रहे साजीब वाजेद जॉय ने दिया है.
जॉय ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि उनकी मां शेख हसीना जुलाई 2024 में हुए विद्रोह से पहले ही संन्यास लेने का मन बना चुकी थी. उन्होंने अल जजीरा को बताया कि यह उनका आखिरी कार्यकाल होने वाला था. अगर वह सत्ता में बनी भी रहती तो वह उनका आखिरी कार्यकाल होता.
शेख हसीना ने दिया था मारने का आदेश?
शेख हसीना के बेटे के इस इंटरव्यू को सुनने के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या हसीना युग का अंत हो गया. जब यही सवाल उनके बेटे जॉय से पूछा गया तो उन्होंने इस सवाल का जवाब हां में दिया. उन्होंने कहा कि मेरी मां कभी भी अवामी लीग के किसी भी व्यक्ति पर निर्भर नहीं रही हैं. साथ ही यह भी कहा कि अवामी लीग 70 साल पुरानी राजनीतिक पार्टी है और यह पार्टी उनके बिना भी चलती रहेगी.
जॉय ने देश में हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर स्वीकारा की अवामी लीग और उनके कार्यकर्ताओं से गलतियां हुई थी, जिसकी वजह से जुलाई 2024 में देशभर में विरोध प्रदर्शन हुआ. हालांकि, उन्होंने मारे गए लोगों पर सभाई देते हुए कहा कि हसीना जानबूझकर खूनखराबा नहीं चाहती थीं. उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए घातक बल इस्तेमाल न करने का निर्णय खुद हसीना का था.
शेख हसीना का ऑडियो क्लिप वायरल
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री का जुलाई में एक ऑडियो क्लिप वायरल हुआ था. जिसमें उन्हें जानलेवा बल के इस्तेमाल की अनुमति देते हुए सुना गया था. जॉय ने इस क्लिप को संदर्भ से हटकर पेश किया गया बताया. उनका दावा है कि आदेश सशस्त्र और हिंसक प्रदर्शनकारियों तथा कथित आतंकवादियों के लिए था, न कि निहत्थे नागरिकों के लिए. जॉय के अनुसार किसी भी देश में अगर सशस्त्र लोग पुलिस और नागरिकों पर गोली चलाएं, तो सरकार क्या करेगी?
उन्होंने बताया कि उस समय कई पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया गया और न्यायिक जांच समितियां गठित की गईं. जॉय ने यह भी कहा कि शेख हसीना ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर न्याय का भरोसा दिया था. उन्होंने कहा कि हम हिंसा नहीं चाहते. लेकिन अगर किसी को कोने में धकेल दिया जाए, तो और क्या ही विकल्प बचता है?