बलूचिस्तान में महिलाओं ने क्यों उठाए हथियार? पाकिस्तानी सेना के खिलाफ BLA में बढ़ी महिला लड़ाकों की भूमिका
पाकिस्तानी सेना के कथित अत्याचारों के बाद बलूचिस्तान की महिलाएं भी BLA में शामिल होकर हथियार उठा रही हैं. जानिए क्यों बढ़ रही है महिला लड़ाकों की भूमिका और कौन हैं आसिफा मेंगल व सुमैया कलंदरानी बलूच.
पाकिस्तानी आर्मी के क्रूर हमलों से तंग आकर बलूचिस्तान की महिलाएं भी हथियार उठा चुकी हैं. पहले इक्का-दुक्का महिलाएं बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) में शामिल होती थीं और उनका उपयोग फिदायीन के रूप में ही किया जाता था. 2022 में सुमैया कलंदरानी बलूच, जो पेशे से पत्रकार थी ओर बीएलए के पहले पुरुष आत्मघाती हमलावर रेहान बलूच की मंगेतर, ने तुरबत में एक सैन्य काफिले को निशाना बनाते हुए फिदायीन हमला किया था, लेकिन अब ऐसा नहीं है.
बलूचिस्तान की महिलाएं भी सीना तानकर बंदूक के बल पर पाकिस्तानी सेना से टक्कर लेती हैं. दरअसल बलूचिस्तान के लड़ाकों पर पाकिस्तानी सेना के बढ़ते अत्याचार ने इन महिलाओं को बंदूक उठाने पर मजबूर किया है. रोटियां बनाने वाले कोमल हाथ अब बंदूक उठाए हुए हैं.
पाक सेना के क्रूर रुख पर बलूचों ने बदली रणनीति
दरअसल पाकिस्तानी सेना पर ऐसे सैकड़ों बलूच युवाओं और नेताओं को गायब करने के आरोप हैं जो शांति से बात के जरिए समाधान के प्रयास में जुटे थे, उन्हें या तो जेलों में डाल दिया गया या फिर मार गिराया गया. महरंग बलूच, शांति से वार्ता की पक्षधर रही हैं, पाकिस्तानी शासन ने उन्हें मार्च 2025 में जेल में डाला हुआ है. उस समय उन्हें क्वेटा से ही एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान उठाया गया था. पाकिस्तानी सेना के रुख के बाद बलूचों ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया और उनकी महिलाएं भी बंदूक उठाकर उनके साथ हो लीं.
महिलाओं ने क्यों थामे हथियार?
पाकिस्तान की पॉलिटिकल साइंटिस्ट आयशा सिद्दीका के मुताबिक हथियार उठाने वालीं अधिकतर वो बलूचिस्तानी महिलाएं हैं जिनके शौहर पाकिस्तानी सेना के द्वारा मौत के घाट उतार दिए गए. पाकिस्तान के क्रूर शासन ने इन महिलाओं के पुरुषों को गायब करा दिया. फरवरी 2026 में जब बीएलए के लड़ाकों ने कई शहरों को एक साथ निशाना बनाया तो इसमें महिलाओं की भी बड़ी भूमिका रही, उस समय पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने खुद महिलाओं की यह भूमिका कबूल की थी.
आसिफा मेंगल ने अपने जन्मदिन पर उठाए थे हथियार
24 साल की आसिफा मेंगल भी इन्हीं परिस्थितियों में हथियार उठाने वाली लड़ाकाओं में शामिल है. वह तीन साल पहले अपने जन्मदिन के मौके पर मजीद ब्रिगेड में शामिल हुई थीं. महिलाओं के हथियार उठाने के बाद पाकिस्तान के लिए बलूचिस्तान का खौफ कई गुना बढ़ गया है. ये महिलाएं अपने वतन की आजादी के लिए आत्मघाती हमलों से आगे बढ़कर अब बंदूक उठाकर विद्रोह के मार्ग पर चल निकली हैं.