पाकिस्तान में बलोच विद्रोहियों का 'ऑपरेशन हेरॉफ 2.0', बैंक पर कब्जा कर रॉकेट से उड़ाया; दहशत में पाक हुकूमत
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में अलगाववादियों ने ऑपरेशन हेरॉफ 2.0 शुरू कर कई शहरों में बड़े हमले किए. बीएलए ने 84 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों को मारने और 18 को बंदी बनाने का दावा किया, जबकि पाकिस्तान ने 67 विद्रोहियों को ढेर करने की बात कही.
नई दिल्ली: 31 जनवरी 2026 को बलूचिस्तान में तब अचानक दहशत फैल गई, जब बलोच लिबरेशन आर्मी ने अपना नया अभियान शुरू किया. ये हमले क्वेटा से लेकर ग्वादर तक फैले, जहां विद्रोहियों ने पुलिस थानों, बैंकों और सैन्य चौकियों को निशाना बनाया. स्थानीय लोगों ने विस्फोटों और गोलीबारी की आवाजें सुनीं, जिससे पूरा इलाका सहम गया. बीएलए ने इसे आजादी की जंग का दूसरा दौर बताया, जबकि पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि हमले नाकाम हो गए. इस घटना ने इस्लामाबाद को हिलाकर रख दिया.
विद्रोहियों ने क्वेटा, नुश्की, ग्वादर, मस्तुंग और अन्य 10 से ज्यादा जिलों में एक साथ कार्रवाई की. रिपोर्ट्स बताती हैं कि उन्होंने पुलिस स्टेशनों पर कब्जा किया, वाहनों को जलाया और सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचाया. क्वेटा में एक बैंक की पूरी बिल्डिंग को मोर्टार से उड़ाने का दावा किया गया, जहां से नकदी और हथियार लूटे गए.
बीएलए का दावा
बलोच लिबरेशन आर्मी के प्रवक्ता ने कहा कि यह ऑपरेशन पाकिस्तानी कब्जे के खिलाफ है. उन्होंने 84 सुरक्षाकर्मियों को मारने और कई को बंदी बनाने की बात की. यह अभियान 2024 के ऑपरेशन हेरॉफ का अगला हिस्सा है, जिसे बलोची में ब्लैक स्टॉर्म कहते हैं. विद्रोही इसे अपनी रक्षा का कदम बता रहे हैं.
कमांडर का संदेश
बीएलए के प्रमुख बशीर जेब बलोच ने वीडियो जारी कर हमलों की जिम्मेदारी ली. वे 2018 से संगठन चला रहे हैं, जब उनके भाई की मौत हुई थी. वीडियो में उन्होंने बलोचों को एकजुट रहने की अपील की. पहले वे छात्र संगठन के नेता थे और अब बड़े अभियानों की अगुवाई कर रहे हैं.
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा कि 10 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए, जबकि 67 विद्रोही मारे गए. उन्होंने हमलों को विदेशी साजिश बताया और ऑपरेशन जारी रखने की बात की. कई इलाकों में इंटरनेट बंद कर दिया गया. सेना ने दावा किया कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन स्थानीय रिपोर्ट्स में तनाव बरकरार है.
स्थानीय निवासियों ने बताया कि विस्फोटों से घर हिल गए और लोग दुकानें बंद कर भागे. अस्पतालों में घायलों की भीड़ लगी. यह घटना बलूचिस्तान की लंबी जंग को नई ताकत दे सकती है, जहां सीपीईसी परियोजनाएं भी निशाने पर हैं. जांच जारी है और आगे तनाव बढ़ सकता है.