ऑस्ट्रेलिया ने की मिसाइल टेस्टिंग, तो घबराया चीन; आखिर क्यों रेथॉन SM-6 से डरता है ड्रैगन?
Australia Test Raytheon Missile: ऑस्ट्रेलिया ने पहली बार स्टैंडर्ड मिसाइल यानी SM-6 का परीक्षण किया है. कहा जा रहा है कि इस मिसाइल परीक्षण से चीन टेंशन में आ गया है. दावा किया जाता है कि SM-6 मिसाइल से चीन की नेवी डरती है, क्योंकि दावा ये भी किया जाता है कि एडवांस्ड SM-6 मिसाइल दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना को चंद मिनटों में ध्वस्त कर सकती है.
Australia Test Raytheon Missile: ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने शनिवार को कहा कि उसने पहली बार नेवी शिप से 'रेथॉन SM-6 मिसाइल' का परीक्षण किया है. सरकार ने इस टेस्टिंग के जरिए SM-6 मिसाइल को अपने भंडार में शामिल करने और उसे हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया. ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि HMAS सिडनी ने 'प्रशांत ड्रैगन 2024' एक्सरसाइज के हिस्से के रूप में अमेरिकी राज्य 'हवाई' के पास ये टेस्टिंग की.
SM-6 अमेरिकी रक्षा भंडार में सबसे एडवांस नौसैनिक वायु रक्षा मिसाइल है, जिसमें बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ भी मारक क्षमता है. इस मिसाइल के जरिए जहाजों और जमीनी टारगेट के साथ-साथ हवा से हवा में टारगेट को मार गिराया जा सकता है.
ऑस्ट्रेलिया के डिफेंस इंडस्ट्रीज और कैपेसिटी डिस्ट्रीब्यूशन मिनिस्टर पैट कॉनरॉय ने कहा कि ये नेवी के लिए महत्वपूर्ण हथियारों के अधिग्रहण में तेजी का एक और उदाहरण है. उन्होंने इस टेस्टिंग को राष्ट्रीय रक्षा रणनीति का एक मुख्य हिस्सा बताया. साथ ही कहा कि इसके जरिए हम लंबी दूरी से अपने विरोधी को रोकने और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हमलों प्रयासों को रोकने में सफल होंगे. रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी (RAN)
चीन से बढ़ते तनाव के बीच ऑस्ट्रेेलिया बढ़ा रहा अपनी ताकत
चीन के साथ बढ़ते तनाव के मद्देनजर ऑस्ट्रेलिया अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए काम कर रहा है. ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने ये नहीं बताया है कि वे संयुक्त राज्य अमेरिका से कितनी मिसाइलें खरीदने की योजना बना रहे हैं. लेकिन जब 2021 में विदेशी सैन्य बिक्री को मंजूरी दी गई थी, तो अमेरिकी सरकार के डॉक्यूमेंट्स में डिफेंस अकाउंट्स और सर्विसेज के लिए 350 मिलियन डॉलर की अनुमानित लागत दिखाई गई थी. इसमें SM-6 और पुरानी SM-2 मिसाइलें शामिल थीं, जो पहले से ही ऑस्ट्रेलिया की नौसेना की ओर से यूज में है.
शनिवार को की गई घोषणा में ये नहीं बताया गया कि एसएम-6 कब से ऑपरेशन में शामिल किया जाएगा, लेकिन कहा गया कि इसे होबार्ट कैटेगरी के विध्वंसक जहाजों पर तैनात किया जाएगा, जिनमें से ऑस्ट्रेलिया के पास तीन हैं. प्रत्येक जहाज 48 वायु रक्षा मिसाइलें ले जा सकता है.
रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी ने पोस्ट किया टेस्टिंग का वीडियो
10 अगस्त को ऑस्ट्रेलियाई सरकार की ओर से रेथॉन (RTX.N) SM-6 मिसाइल की सक्सेसफुल टेस्टिंग के बाद रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी (RAN) ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें होबार्ट-क्लास पोत से मिसाइल दागी जाती दिखाई गई. दावा किया जा रहा है कि मल्टी-मिशन स्टैंडर्ड मिसाइल-6 (SM-6) को विमान-रोधी युद्ध, जहाज-रोधी हमले और टर्मिनल बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा मिशनों को अंजाम देने के लिए डिज़ाइन किया गया है.
2021 में संयुक्त राज्य अमेरिका ने फ्यूचर के SM-6 और SM-2 प्रोडक्शन और इसके उपकरणों से संबंधित रक्षा सेवाओं की संभावित विदेशी सैन्य बिक्री (FMS) को मंजूरी दी. ऑस्ट्रेलिया की ओर से SM-6 मिसाइल का परीक्षण और खरीदारी ऐसे समय में की जा रही है, जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के साथ मतभेद बढ़ रहे हैं. हालांकि दोनों पक्षों ने तनाव कम करने के लिए कदम उठाए हैं, लेकिन टकराव अभी भी जारी है.
मई में मामला तब चरम पर पहुंच गया जब ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने आरोप लगाया कि चीनी वायु सेना के जे-10 विमान ने उत्तर कोरिया के खिलाफ प्रतिबंधों को लागू करने के लिए ऑस्ट्रेलियाई MH60R सीहॉक हेलीकॉप्टर के ऊपर और कुछ सौ मीटर आगे फ्लेयर्स फेंके. पिछले कुछ वर्षों में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जिसके कारण कैनबरा को अपनी सेना को अपग्रेड करना पड़ा. इसमें चीन को रोकने के लिए अमेरिका के प्रभाव का विस्तार करना और कनाडा जैसे देशों के साथ गठबंधन बनाना भी शामिल है.
चीन के लिए परेशानी का सबब बन गया है एसएम-6 मिसाइल
दावा किया जाता है कि चीन को SM-6 मिसाइल से नफरत है, या कहें कि चीन इस मिसाइल से डरता है. दरअसल, एसएम-6 मिसाइल को लंबी दूरी वाले एंटी-एयर वारफेयर (ईआर-एएडब्ल्यू) के लिए बनाया गया था, जिसमें मानव रहित हवाई वाहनों, फिक्स्ड और रोटरी-विंग विमानों, भूमि और समुद्र पर संघर्ष में एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों और टर्मिनल बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा के खिलाफ सुरक्षा शामिल है. ये एक हाई स्पीड एंटी शिप मिसाइल भी है.
ये मिसाइल पहले की SM-2ER ब्लॉक IV (RIM-156A) मिसाइल एयरफ्रेम पर आधारित है. रेथॉन SM-6 मिसाइल को 'एक में तीन मिसाइल' के रूप में बताया गया है. ये एकमात्र ऐसा हथियार है जो एंटी-एयर वॉरफेयर, एंटी-सरफेस वॉरफेयर और बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस या समुद्र-आधारित टर्मिनल मिशन कर सकता है. अमेरिका के साथ संभावित संघर्ष के खतरे के कारण चीन इस मिसाइल को लेकर चिंतित है. ऑस्ट्रेलिया के अलावा, अमेरिका के सहयोगी देश जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया ने भी इस मिसाइल को खरीदने का फैसला किया है.