भारत है अगला टारगेट! फ्रांस में छात्र आंदोलन के पीछे इस्लामी और वामपंथी? अमेरिकी पत्रकार की चेतावनी
फ्रांस में छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर अमेरिकी मीडिया की एक रिपोर्ट और पत्रकार असरा नोमानी की टिप्पणियों ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भूमिका पर बहस छेड़ दी है.
नई दिल्ली: फ्रांस में छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर फॉक्स न्यूज की एक रिपोर्ट में करीब 50 संगठनों की भूमिका की पहचान किए जाने का दावा किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें छात्र और युवा समूहों के अलावा श्रमिक संघ, कम्युनिस्ट और समाजवादी संगठन, राजनीतिक दल तथा फिलिस्तीन समर्थक एक समूह भी शामिल हैं.
रिपोर्ट में इन संगठनों के बीच अंतरराष्ट्रीय संपर्क और विदेशी फंडिंग की आशंकाएं जताई गई हैं. हालांकि, किसी संगठन की मौजूदगी या भागीदारी अपने आप में गैरकानूनी गतिविधि का प्रमाण नहीं है.
असरा नोमानी ने भारत को लेकर क्यों जताई चिंता?
असरा नोमानी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी रिपोर्ट साझा करते हुए पहले की चेतावनी 'NEXT: INDIA' का उल्लेख किया. उनका दावा है कि फ्रांस में दिख रहे आंदोलनकारी नेटवर्क और भारत में सक्रिय कुछ संगठनों के बीच वैचारिक या संगठनात्मक संपर्कों की पड़ताल होनी चाहिए. उन्होंने चीन के शंघाई में रहने वाले कारोबारी नेविल रॉय सिंघम और उनके कथित नेटवर्क का भी जिक्र किया. ये आरोप हैं; इनसे भारत में किसी प्रदर्शन के विदेशी नियंत्रण में होने की पुष्टि नहीं होती.
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इंडियन अलायंस पेरिस और पीपल्स फोरम का संदर्भ
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट में इंडियन अलायंस पेरिस का भी उल्लेख है, जो फ्रांस में भारतीय छात्रों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों से जुड़ा संगठन है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस संगठन ने जनवरी 2023 में न्यूयॉर्क में नाटो के विस्तार के विरोध में हुए एक कार्यक्रम को सह-प्रायोजित किया था. यह आयोजन पीपल्स फोरम में हुआ था. रिपोर्ट में दावा है कि इस केंद्र को सिंघम से 22.44 मिलियन डॉलर की फंडिंग मिली थी. इस संबंध का उल्लेख अपने आप में भारत के प्रदर्शनों की फंडिंग साबित नहीं करता.
भारत के छात्र संगठनों और प्रदर्शनों का भी जिक्र
नोमानी ने दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों के संदर्भ में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) जैसे संगठनों का उल्लेख किया. उन्होंने विजय प्रसाद की भूमिका और सिंघम के कथित नेटवर्क से संभावित संपर्कों पर भी सवाल उठाए.
हरीश साल्वे ने भी उठाया विदेशी फंडिंग का मुद्दा
भारत में प्रदर्शनों को लेकर वरिष्ठ वकील और पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने भी विदेशी फंडिंग की आशंका जताई थी. लंदन में उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन को बाहर से आर्थिक मदद और प्रोत्साहन मिल रहा है. उन्होंने भारत में बांग्लादेश और नेपाल जैसे हालात पैदा करने की कोशिश का भी दावा किया.