'ईरान ने गिफ्ट किए 10 तेल टैंकर, सभी पर लगा था पाकिस्तानी झंडा', युद्धविराम पर बातचीत के बीच ट्रंप का बड़ा दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यह असामान्य गतिविधि थी क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर टैंकरों का एक साथ गुजरना सामान्य नहीं होता. ट्रंप ने इसे एक सकारात्मक संकेत के रूप में पेश किया, जो बातचीत की दिशा को दर्शाता है.
नई दिल्ली: व्हाइट हाउस में कैबिनेट बैठक के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला दावा किया है. उन्होंने कहा कि ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही गुप्त बातचीत के बीच सद्भावना दिखाने के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल से भरे कई टैंकरों को गुजरने की अनुमति दी.
ट्रंप के अनुसार, इन टैंकरों की संख्या पहले आठ थी, जो बाद में बढ़कर दस हो गई. उन्होंने यह भी कहा कि ये जहाज कथित रूप से पाकिस्तानी झंडे के तहत चल रहे थे. राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि शुरुआत में आठ बड़े तेल टैंकरों को गुजरने दिया गया और बाद में दो और तेल टैंकरों को निकलने की अनुमति दी गई. उन्होंने कहा कि यह जानकारी उन्हें सीधे नहीं बल्कि समाचार रिपोर्ट के जरिए मिली.
'यह असामान्य गतिविधि थी'
उनके अनुसार, यह असामान्य गतिविधि थी क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर टैंकरों का एक साथ गुजरना सामान्य नहीं होता. ट्रंप ने इसे एक सकारात्मक संकेत के रूप में पेश किया, जो बातचीत की दिशा को दर्शाता है. ट्रंप ने खासतौर पर यह भी उल्लेख किया कि इन टैंकरों पर पाकिस्तानी झंडा लगा था. इससे पाकिस्तान की संभावित भूमिका पर चर्चा तेज हो गई है.
गुप्त बातचीत और संवेदनशीलता
अपने बयान में ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि ये बातचीत बेहद संवेदनशील है. उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि कहीं उनके बयान से बातचीत प्रभावित न हो जाए. इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका और ईरान के बीच बैकचैनल संवाद जारी है.
ईरान ने प्रस्ताव किया खारिज
इससे पहले यह खबर सामने आई थी कि ईरान ने हाल ही में अमेरिका द्वारा पेश किए गए युद्धविराम प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है. तेहरान का कहना है कि यह प्रस्ताव पूरी तरह एकतरफा है और इसमें उसके सुरक्षा हितों की अनदेखी की गई है. हालांकि, कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की संभावनाएं अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं.
प्रस्ताव को बताया पक्षपाती
ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अमेरिका का प्रस्ताव उसकी रक्षा क्षमता को सीमित करने की बात करता है, जबकि बदले में प्रतिबंध हटाने की कोई स्पष्ट योजना नहीं देता. ईरान ने इसे अनुचित और असंतुलित बताते हुए कहा कि यह केवल अमेरिका और इजरायल के हितों को साधने की कोशिश है. तेहरान का मानना है कि इस तरह के प्रस्ताव से स्थायी समाधान संभव नहीं है.