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'नैतिकता नहीं ताकत का समय...', अमेरिकी अर्थशास्त्री ने दी भारत को चेतावनी, क्वाड को लेकर दिया खास संदेश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला पर कब्जा कर चुके हैं. ग्रीनलैंड, ईरान समेत अन्य कई देशों पर हमले की तैयारी में है. ऐसे में अमेरिकी अर्थशास्त्री जेफरी सैक्स ने भारत को खास संदेश दिया है.

ANI
Shanu Sharma

अमेरिकी अर्थशास्त्री जेफरी सैक्स दुनिया के सबसे प्रसिद्ध लोगों में जाने जाते हैं. उन्होंने हाल में भारत को क्वाड से बाहर निकलने और अपनी स्वतंत्र रणनीति अपनाने की सलाह दी है. उनका मानना है कि अमेरिका के नेतृत्व में दुनिया अब नैतिकता से ज्यादा ताकत पर चल रही है, जहां कमजोर देशों को कोई सहानुभूति नहीं मिलती. 

जेफरी ने ट्रंप प्रशासन की हालिया कार्रवाइयों जैसे वेनेजुएला पर सैन्य हस्तक्षेप और ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकियां को बदलते वैश्विक परिदृश्य का असर बताया है. इतना ही नहीं उन्होंने भारत को एक मजबूत देश बताया और कई सलाह भी दिए हैं.

जेफरी सैक्स ने क्या कहा?

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर खुद को वेनेजुएला का 'एक्टिंग प्रेसिडेंट' बताया था. इसके अलावा उन्होंने ग्रीनलैंड को भी चेतावनी दी. उन्होंने साफ कहा था कि अमेरिका ग्रीनलैंड को रूस या चीन के हवाले नहीं छोड़ सकता है. इसके अलावा ईरान, मैक्सिको और कोलंबिया जैसे देशों में डोनाल्ड ट्रंप कहीं न कहीं शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं. जेफरी सैक्स ने कई साक्षात्कारों में कहा है कि क्वाड (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) अमेरिका का खेल है, जिसमें भारत को चीन के खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है.

उनका कहना है कि अमेरिका अस्थिर, गैर-जिम्मेदार और खतरनाक हो चुका है. भारत जैसा बड़ा देश किसी के खेल में नहीं खेलना चाहिए. सैक्स ने सुझाव दिया कि भारत को अपनी सैन्य शक्ति तेजी से बढ़ानी चाहिए.  साथ ही रक्षा बजट को कम से कम दोगुना करना, हथियारों, ट्रेनिंग और टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ाना जरूरी बताया है. उन्होंने कहा कि अगर मिलिट्री मजबूत होगी तो अर्थव्यवस्था भी सुरक्षित रहेगी. 

यूरोप की गलतियों से सीखने की जरूरत 

सैक्स ने यूरोप का उदाहरण दिया, जहां देशों ने अमेरिका पर निर्भर रहकर अपना रक्षा खर्च कम किया और अमेरिकी ठिकानों से भरा दिया. नतीजा? आज वे ट्रंप की धमकियों के सामने बेबस हैं. यूक्रेन संकट में भी वे अमेरिका से मदद की भीख मांग रहे हैं. भारत को ऐसी कमजोरी नहीं दोहरानी चाहिए. आज का दौर ताकत का है, जहां अमेरिका 38 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज के बावजूद अपनी सैन्य ताकत से दुनिया को डरा रहा है.

सैक्स का मानना है कि ट्रंप सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि इस नई व्यवस्था का प्रतीक है. अगर ट्रंप चले गए तो भी कोई दूसरा ट्रंप आएगा. भारत को अगले दशक में अपनी मिलिट्री को चीन के स्तर के करीब लाना होगा. न्यूक्लियर, स्पेस और पारंपरिक हथियारों में निवेश जरूरी है. जनता को कुर्बानी के लिए तैयार रहना होगा, क्योंकि मजबूत सेना ही असली सुरक्षा देगी. क्वाड जैसे गठबंधनों पर निर्भरता छोड़कर भारत को अपनी दिशा खुद तय करनी होगी.