तालिबान के राज में अफगानिस्तान का सत्यानाश! गरीबी के कारण बच्चे बेचने को मजबूर हो रहे मां-बाप, रोटी भी नसीब नहीं
अफगानिस्तान में इस समय काफी ज्यादा गरीबी बढ़ चुकी है. लोगों के पास खाने के लिए पैसे नहीं बचे हैं, स्थिति ऐसी आ चुकी है कि लोग अपने बच्चे बेच रहे हैं.
अफगानिस्तान में इस समय गरीबी इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि लोगों के पास खाने के लिए खाना तक नहीं बचा है. संयुक्त राष्ट्र और यूएनडीपी की रिपोर्ट के मुताबिक 47 लाख लोग लगभग पूरी तरह से भुखमरी की चपेट में आ गए हैं. यह संख्या कोई छोटी संख्या नहीं बल्कि पूरे देश की आबादी का लगभग 10 प्रतिशत है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गरीबी इस हद तक बढ़ चुकी है कि लोग अपने बच्चे को भी बेच रहे हैं. अफगानिस्तान की यह स्थिति किसी एक वजह से नहीं बल्कि कई कारणों से हुई है. साल 2021 में अफगानिस्तान में तालिबानी राज आ गया. जिसके बाद विदेशों से आने वाले फंड और मदद राशि को पूरी तरह से रोक दी गई.
देश में बढ़ रही कुपोषितों की संख्या
अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के आने से पहले तक विदेशों से आटा, तेल, दाल और बच्चों के पोषण की सामग्री दी जाती थी. लेकिन अब सब कुछ आने बंद हो गए हैं. जिसका असर यह हुआ कि पूरा देश एक-एक दाने के लिए मोहताज बन गया. यूएन रिपोर्ट के मुताबिक 20 लाख से ज्यादा बच्चे गंभीर कुपोषण के शिकार हो गए हैं. इसमें कुछ बच्चे ऐसी स्थिति में पहुंच चुके हैं कि उनकी जान भी जा सकती है. इनके अलावा गर्भवती महिलाएं या फिर वो महिलाएं जो बच्चों को स्तनपान कराती हैं, वे भी कुपोषण का शिकार हो चुकी हैं. इस समस्या से अफगानिस्तान पर न केवल आज बल्कि आने वाले कई सालों तक मुसीबत के पहाड़ टूट सकते हैं.
एक साथ टूटें कई मुसीबत के पहाड़
रिपोर्ट के मुताबिक देश के लगभग 80 प्रतिशत परिवार कर्ज में डूबा है और उन परिवारों के पास कर्ज से निकलने का कोई रास्ता भी नहीं बचा है. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक एक नौकरी को पाने के लिए दर्जनों लोग मुसीबत का सामना कर रहे हैं. वहां की स्थानीय मीडिया के मुताबिक बीमार पड़ रहे लोगों के पास इलाज करवाने के पैसे नहीं बचे हैं.
दुनिया में चल रहे युद्ध की वजह से लाखों अफगानिस्तानी नागरिक भी अपने देश भी लौटे हैं, जिसके कारण दबाव और भी ज्यादा बढ़ गया है. अफगानिस्तान कुछ समय पहले तक खुद पाकिस्तान के साथ जंग कर रहा था, लेकिन अब खाने के लाले पड़े हैं. देश में सूखे के कारण अनाज भी नहीं उपज पा रहा है, जिसके कारण यह समस्या काफी ज्यादा बढ़ गई है.