होर्मुज संकट के बीच अफगानिस्तान का बड़ा दांव-अमू दरिया से तेल उत्पादन शुरू, 121 देशों की नजरें, क्या बदल जाएगी वैश्विक ऊर्जा की पूरी राजनीति

मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज संकट के बीच अफगानिस्तान से आई एक खबर ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में नई उम्मीद जगा दी है. उत्तरी जौजजान प्रांत में तेल उत्पादन शुरू हो गया है, जो भारत समेत कई देशों के लिए अहम साबित हो सकता है.

Lalit Sharma

दुनिया इस समय तेल संकट की आशंका से जूझ रही है. ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट बंद किए जाने के खतरे ने वैश्विक सप्लाई चेन को झटका दिया है, जिससे लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार प्रभावित होने की आशंका है. ऐसे माहौल में अफगानिस्तान से आई यह खबर राहत देने वाली मानी जा रही है, जहां अब जमीन के नीचे छिपे तेल के भंडार को निकालने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.

अमू दरिया बेसिन से शुरू हुआ उत्पादन

अफगानिस्तान के माइंस और पेट्रोलियम मंत्रालय ने जानकारी दी है कि उत्तरी जौजजान प्रांत के अमू दरिया बेसिन में स्थित जमराड साई क्षेत्र में पांच तेल कुओं से उत्पादन शुरू कर दिया गया है. फिलहाल इन कुओं से रोजाना करीब 500 क्यूबिक मीटर तेल निकाला जा रहा है. शुरुआती स्तर पर यह उत्पादन भले ही सीमित हो, लेकिन भविष्य में इसके बड़े स्तर तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है.

छह महीनों में तेजी से बढ़ी खोज

पिछले छह महीनों में इस क्षेत्र में करीब 400 किलोमीटर का सीस्मिक सर्वे किया गया, जिससे तेल और गैस के बड़े भंडार की संभावना सामने आई. अफगान इंजीनियरों और विशेषज्ञों की लगातार मेहनत के बाद अब इस परियोजना को जमीन पर उतारा गया है. कुल 12 कुओं में से पांच में पायलट प्रोडक्शन शुरू होना इस दिशा में बड़ी सफलता मानी जा रही है.

अर्थव्यवस्था को मिल सकती है मजबूती

अगर अफगानिस्तान इस उत्पादन को लगातार बढ़ाने और निर्यात तक पहुंचाने में सफल होता है, तो यह उसकी कमजोर अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है. दशकों से अस्थिरता और आर्थिक संकट से जूझ रहे देश को इससे नई ताकत मिल सकती है. सरकार ने प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए कई बड़े प्लान भी तैयार किए हैं.

भारत के लिए खुल सकता है नया रास्ता

इस खोज का असर भारत पर भी पड़ सकता है. भारत लंबे समय से तेल आयात के लिए नए विकल्प तलाश रहा है. अफगानिस्तान के साथ अच्छे संबंध होने के कारण भारत के लिए यहां से तेल आयात करना एक सस्ता और तेज विकल्प बन सकता है. इससे न सिर्फ लागत कम होगी, बल्कि सप्लाई की स्थिरता भी बढ़ेगी.

चीनी कंपनियों के साथ पहले ही हो चुका समझौता

साल 2023 में अफगानिस्तान की सरकार ने अमू दरिया बेसिन से तेल निकालने के लिए एक चीनी कंपनी के साथ समझौता किया था. इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत उत्तरी सर-ए-पुल प्रांत में तेल रिजर्व बनाने की योजना भी शामिल थी. अब करीब तीन साल बाद इस परियोजना के नतीजे सामने आने लगे हैं, जो इस समझौते की सफलता को दर्शाते हैं.

वैश्विक राजनीति पर भी पड़ेगा असर?

इस नए तेल स्रोत के सामने आने से वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में भी बदलाव आ सकता है. जहां एक ओर मध्यपूर्व में तनाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर अफगानिस्तान का यह कदम नए समीकरण बना सकता है. अगर उत्पादन बढ़ता है, तो कई देशों की निर्भरता पारंपरिक तेल सप्लायर देशों पर कम हो सकती है.

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अफगानिस्तान इस उत्पादन को कितनी तेजी से बढ़ा पाता है और क्या वह इसे निर्यात स्तर तक ले जा पाएगा. फिलहाल यह शुरुआत उम्मीद जगाने वाली जरूर है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह खोज वैश्विक तेल संकट को कम करने में अहम भूमिका निभा पाती है या नहीं.