30 बम गिराकर 15 ठिकाने तबाह, इजरायल ने की सारी सीमाएं पार, यमन के खात्मे के लिए 10 लड़ाकू विमानों ने भरी सबसे लंबी उड़ान
इजरायल की वायु सेना ने बताया कि यमन को निशाना बनाने के लिए उसके 10 लड़ाकू विमानों ने 2,350 किलोमीटर की सबसे लंबी यात्रा की और दुश्मन देश के 15 ठिकानों पर एक के बाद एक 30 बम गिराए
लगता है इजरायल ने यमन को नेस्तनाबूद करने की कसम खा ली है. बुधवार को यमन पर हमला करने के लिए इजरायल के 10 लड़ाकू विमानों ने युद्ध की शुरुआत से लेकर अब तक की सबसे लंबी उड़ान भरी. इजरायल की वायु सेना ने बताया कि यमन को निशाना बनाने के लिए उसके 10 लड़ाकू विमानों ने 2,350 किलोमीटर की सबसे लंबी यात्रा की और दुश्मन देश के 15 ठिकानों पर एक के बाद एक 30 बम गिराए
सेना के अनुसार, 10 से अधिक लड़ाकू विमानों ने 2,350 किलोमीटर (1,460 मील) की दूरी तय कर सना और अल-जॉफ क्षेत्र में 15 ठिकानों पर 30 बम गिराए. यह हमला हाल के हफ्तों में हूती विद्रोहियों द्वारा इजरायल पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों, जिसमें दक्षिणी इजरायल के रेमन हवाई अड्डे पर सीधा हमला शामिल है, के जवाब में किया गया.
सबसे लंबी उड़ान और हवाई ईंधन भराई
इजरायली लड़ाकू विमानों ने सऊदी हवाई क्षेत्र से बचने के लिए लंबा चक्कर लगाया, जिसके कारण यह उड़ान युद्ध शुरू होने के बाद से सबसे लंबी उड़ान बन गई. हमले के लिए जाते समय और वापसी में कई बार हवाई ईंधन भराई की गई. हालांकि, यह युद्ध का सबसे दूर का हमला नहीं है, क्योंकि सना इजरायल से केवल 1,800 किलोमीटर (1,118 मील) दूर है. सबसे दूर का हमला जून में ईरान के मशहद हवाई अड्डे पर किया गया था, जो इजरायल से 2,300 किलोमीटर (1,429 मील) दूर है.हूती ठिकानों पर निशानाइजरायली रक्षा बल (IDF) ने पुष्टि की कि हमले में सना और अल-जॉफ क्षेत्र में हूती विद्रोहियों के सैन्य शिविर, प्रचार विभाग का मुख्यालय और एक ईंधन डिपो को निशाना बनाया गया. आईडीएफ के अनुसार, हूती प्रचार विभाग "मीडिया में उकसावे और प्रचार संदेश फैलाने के लिए जिम्मेदार है, जिसमें नेता अब्दुल-मलिक अल-हूती के भाषण और प्रवक्ता याह्या सारी के बयान शामिल हैं." सेना ने कहा, "युद्ध के दौरान, इस मुख्यालय ने शासन के प्रचार और मनोवैज्ञानिक आतंक प्रयासों का नेतृत्व किया."
आतंकी गतिविधियों का केंद्र
आईडीएफ ने बताया कि हमले में निशाना बनाए गए हूती शिविर ईरान समर्थित समूह द्वारा "आईडीएफ और इजरायल राज्य के खिलाफ आतंकी हमलों की यो के लिए उपयोग किए जा रहे थे. इन शिविरों में शासन के संचालन और खुफिया कमांड केंद्र भी शामिल थे."
यह हमला हूती विद्रोहियों की बढ़ती आक्रामकता को रोकने के लिए इजरायल की रणनीति का हिस्सा है.क्षेत्रीय तनाव और भविष्यहूती विद्रोहियों के बार-बार हमलों ने मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा दिया है. इजरायल का यह सटीक और लंबी दूरी का हमला उसकी सैन्य क्षमता को दर्शाता है, लेकिन यह क्षेत्रीय स्थिरता पर भी सवाल उठाता है. यमन में हूती विद्रोहियों और इजरायल के बीच बढ़ता संघर्ष वैश्विक ध्यान आकर्षित कर रहा है.