दुनिया की सबसे बड़ी गैस फील्ड पर अमेरिका-इजरायल का अटैक, ईरान के लिए क्यों खास है साउथ पार्स? वैश्विक बाजार में उथल-पुथल
साउथ पार्स गैस फील्ड दुनिया के सबसे बड़े गैस भंडारों में से एक है, जिसे ईरान और कतर साझा करते हैं. यह ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.
नई दिल्ली: ईरान के सरकारी टेलीविजन ने दावा किया है कि अमेरिका और इजरायल की सेना ने देश के सबसे अहम साउथ पार्स गैस फील्ड और उससे जुड़े तेल ठिकानों को निशाना बनाया है. यह हमला दक्षिणी बुशहर प्रांत के असालुयेह इलाके में हुआ, जिसे ईरान की ऊर्जा गतिविधियों का केंद्र माना जाता है. हमले के बाद इलाके में आग लग गई और दमकल की टीमें हालात काबू में लाने में जुटी हुई हैं.
बुशहर प्रांत के उप-गवर्नर एहसान जहानियान के अनुसार, मिसाइल हमले में साउथ पार्स स्पेशल इकोनॉमिक एनर्जी जोन के गैस संयंत्र को सीधा निशाना बनाया गया. मौजूदा संघर्ष के दौरान यह पहली बार है जब ईरान के प्रमुख तेल और गैस उत्पादन केंद्रों पर हमला हुआ है. इससे पहले खार्ग द्वीप स्थित तेल टर्मिनल को निशाना बनाया गया था, लेकिन यह हमला सीधे उत्पादन इकाइयों पर केंद्रित रहा.
साउथ पार्स का रणनीतिक महत्व
साउथ पार्स गैस फील्ड दुनिया के सबसे बड़े गैस भंडारों में से एक है, जिसे ईरान और कतर साझा करते हैं. यह ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. वर्ष 2025 में यहां से प्रतिदिन लगभग 730 मिलियन क्यूबिक मीटर गैस का उत्पादन हुआ था, जो देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा करता है.
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति पर असर
यह गैस फील्ड न केवल ईरान की आंतरिक मांग पूरी करता है, बल्कि तुर्की और इराक जैसे देशों को भी पाइपलाइन के जरिए आपूर्ति करता है. ऐसे में इस क्षेत्र पर हमला होने से ईरान की ऊर्जा आपूर्ति और राजस्व पर सीधा असर पड़ सकता है.
वैश्विक बाजार में उथल-पुथल
हमले की खबर सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है. यूरोपीय गैस बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया. वहीं, ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई. मध्य पूर्व से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस की आपूर्ति होती है, इसलिए इस तरह की घटनाएं वैश्विक कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं.
ऊर्जा क्षेत्र पर दीर्घकालिक प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस क्षेत्र में उत्पादन या आपूर्ति लंबे समय तक बाधित होती है, तो वैश्विक स्तर पर पेट्रोल, डीजल और बिजली की कीमतों में तेजी आ सकती है. यह इलाका दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा भंडारों में से एक है, जहां तेल और गैस का बड़ा हिस्सा मौजूद है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है.
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