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लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के फेल होते ही बढ़ा घमासान, विपक्ष ने सरकार को दिया यह सुझाव

महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल लोकसभा में पास नहीं हो पाया. विपक्ष ने सरकार से मौजूदा सीटों में ही आरक्षण लागू करने या परिसीमन से इसे अलग करने की मांग की है.

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Km Jaya

नई दिल्ली: लोकसभा में महिलाओं को आरक्षण देने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लेकर केन्द्र सरकार को बड़ा झटका लगा है. शुक्रवार को हुए मतदान में यह बिल आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाया. बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया. कुल 528 सांसदों ने वोटिंग में हिस्सा लिया लेकिन बिल पास होने के लिए 352 वोट जरूरी थे.

इस विधेयक के फेल होने के बाद विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए हैं. विपक्षी नेताओं का कहना है कि अगर सरकार वास्तव में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना चाहती है तो मौजूदा 543 सीटों में से ही करीब 180 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित क्यों नहीं करती. उनका यह भी सुझाव है कि महिलाओं के आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से अलग किया जाए ताकि इसे जल्द लागू किया जा सके.

प्रियंका चतुर्वेदी ने क्या कहा?

शिवसेना की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि अगर भाजपा खुद को नारी शक्ति का समर्थक बताती है, तो उसे 2029 के चुनाव से पहले स्वेच्छा से 543 सीटों में से 180 सीटें महिलाओं के लिए तय करनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार चाहे तो नए संशोधन के जरिए आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से अलग कर सकती है.

कांग्रेस के नेताओं ने क्या की मांग?

कांग्रेस के कई नेताओं ने भी इसी तरह की मांग उठाई है. उनका कहना है कि वे महिलाओं के आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं लेकिन सरकार इसे परिसीमन से जोड़कर राजनीतिक नक्शा बदलने की कोशिश कर रही है. विपक्ष का आरोप है कि परिसीमन के जरिए दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों को नुकसान पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है.

विपक्षी दलों के गठबंधन ने संकेत दिया है कि वे प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पुराने महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने की मांग करेंगे. साथ ही देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह संदेश देने की योजना है कि वे महिलाओं को आरक्षण देने के पक्ष में हैं लेकिन सरकार के तरीके से असहमत हैं.

क्या था उद्देश्य?

यह विधेयक 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने के उद्देश्य से लाया गया था. इसमें लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव भी शामिल था, ताकि परिसीमन के बाद आरक्षण लागू किया जा सके.

विधेयक के फेल होने के बाद सरकार ने साफ किया कि अब वह इससे जुड़े अन्य दो विधेयकों को आगे नहीं बढ़ाएगी, क्योंकि वे इस बिल से जुड़े हुए थे. वहीं सरकार ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उसने महिलाओं को सम्मान देने का मौका गंवा दिया.