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India Daily

भारत-चीन रिश्तों की नई शुरुआत, SCO में हुई पहली द्विपक्षीय बैठक; भारत आ सकते हैं जिनपिंग

पूर्वी लद्दाख विवाद सुलझने के बाद भारत और चीन के बीच पहली SCO द्विपक्षीय बैठक 16-17 अप्रैल को हुई. दोनों देशों ने SCO, BRICS में सहयोग बढ़ाने, सुरक्षा, व्यापार और कनेक्टिविटी पर चर्चा की.

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Edited By: Reepu Kumari
भारत-चीन रिश्तों की नई शुरुआत, SCO में हुई पहली द्विपक्षीय बैठक; भारत आ सकते हैं जिनपिंग
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच तनाव कम होने के बाद संबंध सुधारने की दिशा में एक और अहम कदम उठाया गया है. 2024 में लद्दाख गतिरोध सुलझने के बाद दोनों देशों के बीच पहली शंघाई सहयोग संगठन (SCO) द्विपक्षीय बैठक 16-17 अप्रैल को संपन्न हुई. इस बैठक को दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों में नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है.

विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज से हुई इस बैठक में सुरक्षा, व्यापार, संपर्क और लोगों के बीच संबंधों जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. चीन ने भारत की BRICS अध्यक्षता का पूरा समर्थन जताया है, जिसके चलते उच्च स्तरीय दौरों की संभावना बढ़ गई है.

SCO में बढ़ता सहयोग

दोनों देशों ने SCO के फैसलों को लागू करने और संगठन की भविष्य की रूपरेखा पर विचार साझा किए. भारत और चीन ने SCO प्लेटफॉर्म पर आपसी विचार-विमर्श और सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई. 

BRICS पर फोकस

चीन ने भारत की BRICS अध्यक्षता का पूर्ण समर्थन किया. चीनी विदेश मंत्री वांग यी 14-15 मई को BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए भारत आ सकते हैं. इसके अलावा शी जिनपिंग के सितंबर में BRICS शिखर सम्मेलन के लिए भारत दौरे की भी संभावना है.

भारत का स्पष्ट रुख

भारत ने SCO में आतंकवाद, कट्टरपंथ और उग्रवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर जोर दिया. साथ ही कनेक्टिविटी की किसी भी पहल में सदस्य देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का पूरा सम्मान जरूरी बताया.

पीएम मोदी का संदेश

पिछले साल SCO शिखर सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी ने साफ कहा था कि संप्रभुता को नजरअंदाज करने वाली कनेक्टिविटी न तो भरोसे की होती है और न ही टिकाऊ. भारत इस रुख पर आज भी अडिग है. 

आगे की राह

यह बैठक दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में सकारात्मक संकेत दे रही है. अगर उच्च स्तरीय दौरे होते हैं तो व्यापार, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर और ठोस प्रगति हो सकती है. अगर जिनपिंग भारत दौरे पर आते है तो रिश्तों में और सुधार के संकेत हो सकते हैं. जिनपिंग के इस फैसले से उनके दोस्त पाकिस्तान को फिर से मिर्ची लग सकती है.