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बलात्कार, हत्या जैसे संगीन जुर्म, फिर कैसे बार-बार राम रहीम को मिल जाता है फरलो और पैरोल?

डेरा सच्चा सौदा का मुखिया गुरमीत राम रहीम सिंह एक बार फिर 21 दिनों की फरलो पर बाहर आ गया है. मंगलवार सुबह ही उसे रोहतक की सुनारिया जेल से रवाना कर दिया गया है. वह उत्तर प्रदेश में अब अगले 21 दिनों तक बाहर रहेगा. उस पर लगे आरोप बेहद संगीन हैं फिर भी उसे जब-जब पैरोल या फरलो मिलती है, सवाल उठते हैं.

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गुरमीत राम रहीम सिंह. जुर्म बहुत संगीन है लेकिन फरलो और पैरोल मिलने की रफ्तार बेहद तेज. जब-जब वह जेल से बाहर आता है, सवाल ये उठते हैं कि क्यों उसे बाहर आने दिया जाता है. साध्वियों के यौन शोषण और हत्या के मामले में गुरमीत राम रहीम दोषी ठहराया जा चुका है लेकिन अब सुनारिया जेल से बाहर आ गया है. उसे 21 दिनों की फरलो मिली है. 

गुरमीत राम रहीम, अब बागपत स्थित बरनामा आश्रम में ठाठ से रहेगा. वह अपने बरनावा आश्रम में सत्संग करेगा. पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने, हरियाणा सरकार से कहा था कि अगर उसे फरलो या पैरोल देनी है तो सरकार बिना सोचे न दे. सरकार ने शर्त रखी है कि उसे 21 दिन बागपत से बाहर नहीं जाना होगा. 

10 अगस्त को हाई कोर्ट में एक याचिका शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) ने दायर की थी कि राम रहीम को बार-बार पैरोल या फरलो देने का तुक क्या है. हाई कोर्ट ने कहा कि यह राज्य सरकार का विषय है और याचिका खारिज कर दी. 

2020 से अब तक, कितनी बार जेल से बाहर आ चुका है राम रहीम?

गुरमीत राम रहीम सिंह को पहली बार साल 2020 में 24 अक्टूबर को पैरोल मिली थी. उसने दलील दी कि वह अपने बीमार मां को देखना चाहता है. 21 मई 2021 को फिर इसी रीजन पर मां से मिलने आया. 7 फरवरी 2022 को उसे तो 21 दिन की पैरोल मिल गई. चौथी बार जून 2022 में 1 महीने की पैरोल मिल गई. 

पांचवी बार अक्टूबर 2022 को 40 दिन, छठी बार 21 जनवरी 2023 को 40 दिन की पैरोल और 7वीं बार 20 जुलाई को 30 दिनों की पैरोल मिली. 8वीं बार नवंबर 2023 में 29 दिन की फरलो, 9वीं बार 19 जनवरी को 60 दिनों की पैरोल. 

10वीं बार 12 अगस्त को 21 दिन की फरलो. अब यह आंकड़ा छलांग लगा चुका है. 13 अक्टूबर 2024 को 21 दिनों की फरलो. उसके बार-बार बाहर आने को लेकर सवाल उठते रहे हैं. बलात्कारी और हत्यारा, दोनों उसे कोर्ट ठहरा चुकी है फिर भी बार-बार मिल रही जमानत को लेकर लोग ये सवाल कर रहे हैं कि आखिर कैसे.

राम रहीम पर कितने चल रहे हैं केस?

गुरमीत राम रहीम पर वैसे कई केस दर्ज हैं लेकिन उसे साध्वी यौन शोषण के मामले में साल 2017 में 10-10 साल की सजा सुनाई जा चुकी है. वह पत्रकार राम चंद्र छत्रपति हत्याकांड में भी दोषी ठहराया जा चुका है. साल 2019 में उसे उम्रकैद दी गई थी. वहीं डेरा मैनेजर हत्याकांड में साल 2024 में वह बरी हो गया था. उस पर डेरा मैनेजर रणजीत सिंह की हत्या के आरोप थे.

किस आधार पर मिलती है राम रहीम को फरलो या पैरोल?

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सौरभ भरद्वाज बताते हैं कि फरलो और पैरोल में अंतर होता है. किसी सजायाफ्ता शख्स को कुछ दिनों का फरलो मिलता है, अगर वह किसी केस में सजायाफ्ता हो तो. यह जेल के अंदर उसके व्यवहार, सामाजिक खतरा और सरकार की अनुशंसा के आधार पर मिलता है. वहीं पैरोल भी राज्य सरकार इन्हीं आधारों पर देती है. राम रहीम को उसके जेल के भीतर अच्छे व्यवहार की वजह से फरलो और पैरोल मिलती है. इस दौरान सरकार की उस पर नजर रहती है.

राम रहीम को बार-बार पैरोल या फरलो पर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने स्पष्ट फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा है कि हरियाणा सरकार डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स (टेंपररी रिलीज) एक्ट 2022 के तहत पैरोल या फरलो दे सकता है. इससे पहले हाई कोर्ट ने कहा था कि उसे पैरोल देने से पहले कोर्ट की मंजूरी अनिवार्य होगी. गुरमीत राम रहीम को बार-बार पैरोल इसी एक्ट के आधार पर मिलता है. हैरान करने वाली बात ये है कि साल 2022 से 2023 के बीच वह 91 दिनों तक लगातार पैरोल पर ही रहा है.