लोगों को सस्ता क्यों नहीं मिल रहा एथेनॉल मिला पेट्रोल? E20 विवाद के बीच केंद्र सरकार ने दिया जनता के हर सवाल का जवाब

सरकार ने स्पष्ट किया है कि E20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित है. इसका उद्देश्य कीमतें घटाना नहीं बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना, प्रदूषण कम करना और किसानों को लाभ पहुंचाना है.

pinterest
Sagar Bhardwaj

देशभर में E20 (20% एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल लागू होने के बाद से वाहन मालिकों के बीच इसके प्रभाव को लेकर लगातार बहस छिड़ी हुई है. एक हालिया सर्वे में दावा किया गया कि 2023 से पहले बनी 66 फीसदी पेट्रोल गाड़ियों के माइलेज में 10% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है. इस बीच, केंद्र सरकार ने एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी कर इन चिंताओं को दूर किया है. सरकार का कहना है कि भारत ने एथेनॉल ब्लेंडिंग का फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया. इसकी शुरुआत 2001 में पायलट प्रोजेक्ट्स से हुई थी और ऑटोमोबाइल निर्माताओं, तेल कंपनियों व तकनीकी विशेषज्ञों से सालों के विचार-विमर्श के बाद ही इसे पूरी तरह लागू किया गया है.

अलग से शुद्ध पेट्रोल बेचना व्यावहारिक नहीं

उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल है कि उन्हें शुद्ध पेट्रोल, E10 या E20 में से अपनी पसंद का ईंधन चुनने का विकल्प क्यों नहीं मिलता? इस पर सरकार का तर्क है कि देश के एक लाख से अधिक ईंधन स्टेशनों, डिपो और पाइपलाइनों के माध्यम से तीन अलग-अलग तरह के पेट्रोल की सप्लाई चेन चलाना व्यावहारिक रूप से असंभव है. इसके अलावा, एथेनॉल उत्पादन के बुनियादी ढांचे में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, जो देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है.

एथेनॉल मिलाने के बाद भी क्यों नहीं घटे दाम?

एक आम धारणा है कि एथेनॉल सस्ता होने के कारण E20 पेट्रोल के दाम कम होने चाहिए. सरकार ने स्पष्ट किया है कि एथेनॉल सम्मिश्रण का मुख्य उद्देश्य देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ाना है, न कि पंप पर कीमतों को कम करना. किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य देने के लिए एथेनॉल को लाभकारी दरों पर खरीदा जाता है. मौजूदा कच्चे तेल की कीमतों के गणित को देखें तो E20 का उत्पादन शुद्ध पेट्रोल से भी महंगा पड़ सकता है. हालांकि, इस नीति से विदेशी मुद्रा की भारी बचत हो रही है और किसानों की आय बढ़ रही है.


इंजन को नुकसान के दावों में दम नहीं

क्या E20 पेट्रोल पुरानी गाड़ियों के इंजन को नुकसान पहुंचा रहा है? सरकार ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. स्पष्टीकरण के अनुसार, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) और सियाम (SIAM) जैसी शीर्ष संस्थाओं द्वारा व्यापक परीक्षण के बाद ही इस ईंधन को मंजूरी दी गई थी. यदि इंजन को कोई खतरा होता, तो कार कंपनियां वाहनों पर वारंटी नहीं देतीं. उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक, लाखों पुराने वाहनों की सर्विसिंग के दौरान E20 से जुड़े नुकसान का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है.

 माइलेज में मामूली कमी, लेकिन फायदे अनेक

सरकार ने यह स्वीकार किया है कि कुछ वाहनों के माइलेज में 3 से 5 प्रतिशत की मामूली गिरावट आ सकती है, क्योंकि एथेनॉल की कैलोरीफिक वैल्यू पेट्रोल से कम होती है लेकिन इसके साथ ही E20 ईंधन बेहतर ऑक्टेन रेटिंग प्रदान करता है, जिससे गाड़ी का पिकअप सुधरता है, इंजन साफ रहता है और कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आती है. सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही बिना पुष्टि वाली खबरों पर भरोसा न करें, क्योंकि E20 पूरी तरह से प्रमाणित और सुरक्षित ईंधन है.