'वायनाड में आई त्रासदी के लिए केरल सरकार ही जिम्मेदार,' पर्यायवरण मंत्रालय को क्यों लग रहा है ऐसा?
पर्यावरण मंत्रालय ने कहा है कि केंद्र सरकार ने वायनाड में किसी भी तरह के विकास के लिए पर्यावरणीय मंजूरी नहीं दी थी. अंधाधुंध विकास की वजह से केरल में ये त्रासदी आई है, जिसमें 200 से ज्यादा लोगों ने जान गंवा दी और कई लोग लापता हो गए. 1200 की आबादी वाला गांव, पानी में बह गया है.
वायनाड हादसे में 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई, 540 से ज्यादा घर बह गए और ऐसी त्रासदी मची, जिसके केरल कभी भूल नहीं पाएगा. केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने वायनाड की त्रासदी के लिए अवैध खनन और अनियंत्रित निर्माण को जिम्मेदार ठहराया है. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को कहा कि अवैध खनन, अनियंत्रित निर्माण और अनियमित वाणिज्यिक गतिविधियों ने वायनाड में आपदा के लिए वजह पैदा की है.
भूपेंद्र यादव ने कहा है कि राज्य सरकार ने ऐसी परियोजनाओं को मंजूरी देने से पहले क्षेत्रीय चुनौतियों को नजर अंदाज किया और इसके प्रभाव को लेकर केंद्र के साथ चर्चा नहीं की. पर्यावरण मंत्रालय ने साफ कहा है कि राज्य सरकार ने पिछले साल फोर लेन अप्रोच के साथ एक ट्यूब यूनिडायरेक्शनल टनल रोड को छोड़कर, किसी अन्य प्रोजेक्ट की मंजूरी नहीं ली है.
क्या हैं पर्यावरण मंत्रालय के तर्क?
ट्यूब यूनिडायरेक्शनल टनल रोड की सोच, कोझीकोड और वायनाड के जिलो में आनाकंपोइल कल्लडी-मेप्पाडी के बीच कनेक्टिंग रोड बनाने की थी. इस टनल के लिए काम शुरू होना बाकी है लेकिन ऐसे प्रोजेक्ट पर मिट्टी की क्षमता, विज्ञान, ढलान कोण और पारिस्थितिकी को समझना जरूरी होता है. बीते 10 साल में राज्य सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया, जब बारिश हुई तो बड़े पैमाने पर त्रासदी मची.
221 लोगों की मौत, कई लापता, जिम्मेदार कौन?
भूपेंद्र यादव का कहना है कि पर्यावरण मंत्रालय के सीनियर अधिकारी यह आगाह करते रहे कि बीते 3 सालों में, केरल ने 3 खादानों के लिए पर्यावरण की मंजूरी दी है. दो वायनाड जिले के हैं, जो ग्रेनाइट पत्थरों के हैं. केरल में दो से तीन दिनों की लगातार बारिश के बाद 30 जुलाई की सुबह वायनाड जिले में दो भूस्खलन हुए. अब तक जिले में कम से कम 221 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग लापता हैं.
गृह मंत्रालय ने भी किया था अलर्ट
केरल राज्य सरकार को हादसे के करीब 7 दिन पहले केंद्र सरकार ने अलर्ट किया था. गृह मंत्री अमित शाह ने ससंद में कहा था कि 23 जुलाई को भारी बारिश और भूस्खलन की वजह से राज्य सरकार को पहले ही अलर्ट किया गया था. राज्य सरकार ने ध्यान नहीं दिया.
क्या है केरल सरकार का रुख?
केरल के वन मंत्री एके ससींद्रन ने भूपेंद्र यादव के बयानों की निंदा की है. उन्होंने कहा है कि यह एक-दूसरे पर आरोप लगाने का सही वक्त नहीं है. उन्होंने कहा, 'केंद्र सरकार का राज्य सरकार पर हादसे को लेकर दोष मढ़ना, संदेह पैदा करता है. ऐसा लग रहा है केंद्र राज्य को वित्तीय मदद देने से इनकार कर सकता है. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री का केरल के लोगों के प्रति अन्याय वाला है.'