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4 बार क्रैक किया UPSC फिर भी नहीं मिली कोई नौकरी, जानिए कौन हैं इसरो के साइंटिस्ट दिव्यांग कार्तिक कंसल

ट्रेनी आईएएस पूजा खडेकर इस समय चर्चा में हैं. आरोप है कि उन्होंने दिव्यांग सर्टिफिकेट गलत तरीके से बनवाया और IAS का पद हासिल किया. इन सबके बीच एक ऐसे दिव्यांग की कहानी चर्चा में है जिसने 4 बार UPSC की परीक्षा क्रैक की थी. इसके बावजूद उन्हें नौकरी नहीं मिली. आवंटन बोर्ड ने उनकी बीमारी की वजह से उन्हें नौकरी ही नहीं आवंटित की. इस समय वह इसरो में वैज्ञानिक हैं. 

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Gyanendra Tiwari

विवादों से घिरी ट्रेनी आईएएस पूजा खडेकर के ऊपर आरोप है कि उन्होंने गलत तरीके से दिव्यांग सर्टिफिकेट बनवाकर IAS का पद हासिल किया. लेकिन एक सचमुच के दिव्यांग शख्स ने 4 बार यूपीएससी की परीक्षा पास की इसके बाद भी उसे कोई पद नहीं मिला. ये शख्स कोई और नहीं बल्कि इसरो के वैज्ञानिक कार्तिक कंसल हैं. 

कहते हैं इंसान के अंदर इतनी योग्यता होती है कि वह अपनी शारीरिक दिव्यांगता को भी मात दे देता है. क्योंकि इसरो वैज्ञानिक कार्तिक कंसल की कहानी तो यही कह रही है. वह ऐसी बीमारी से पीड़ित है जिसमें समय के साथ-साथ शरीर की मांसपेशियां कमजोर होने लगती है.

14 की उम्र से व्हीलचेयर पर हैं कार्तिक

कार्तिक कंसल ये नाम लोगों को कुछ कर गुजर जाने की प्रेरणा देता है. 14 साल की उम्र से ही कार्तिक व्हीलचेयर पर हैं. व्हीलचेयर पर बैठे-बैठे उन्हें फर्श से अर्श तक का सफर तय किया. कार्तिक जिस  बीमारी से पीड़ित हैं उसे मस्कुलर डिस्ट्रॉफी कहते हैं. 8 साल की उम्र में कार्तिक में इस बीमारी का पता चला था.  

IIT रुढ़की से पढ़ाई और फिर क्रैक किया UPSC 

कार्तिक ने IIT रुढ़की से पढ़ाई की है. देश की किसी भी आईआईटी में दाखिला पाने के लिए लाखों छात्र हर साल परीा देते हैं लेकिन कुछ हजार को ही आईआईटी में पढ़ने का मौका मिल पाता है. इन्हीं में से एक थे कार्तिक कंसल. उन्होंने  IIT रुढ़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी.

यहां से पढ़ने के बाद कार्तिक ने यूपीएससी तैयारी शुरू कर दी. उन्होंने  4 बार यूपीएससी की परीक्षा क्रऐक की. 2019 में उनकी रैंक 813 थी. 2021 में उनकी रैंक 271 थी, 2022 में उनकी रैंक 784 थी और 2023 में उनकी रैंक 829 थी. इतनी अच्छी रैंक आने के बाद भी उन्हें UPSC ने कोई नौकरी नहीं दी कारण है.

हासिल की थी 271वीं रैंक  

2021 में जब उनकी रैंक 271 थी, तब विकलांगता कोटे के बिना भी उन्हें आईएएस मिलना चाहिए था, क्योंकि उस साल 272 और 273 रैंक वालों को IAS की रैंक मिली थी. लेकिन 2021 में, आईएएस के लिए योग्य कार्यात्मक वर्गीकरण में मस्कुलर डिस्ट्रॉफी को स्थितियों की सूची में शामिल नहीं किया गया था.

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी को भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) ग्रुप ए और भारतीय राजस्व सेवा (सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क) की सूची में शामिल किया गया था, जो कार्तिक की दूसरी और तीसरी पसंद थी. 2019 में, जब कार्तिक कंसल को 813वीं रैंक मिली, तो उन्हें आसानी से एक सेवा आवंटित की जा सकती थी.

AIMS के मेडिकल बोर्ड ने 90% विकलांग माना

एम्स के मेडिकल बोर्ड ने प्रमाणित किया कि कार्तिक कंसल के दोनों हाथ और पैर मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से प्रभावित हैं. आईएएस के लिए, दोनों हाथ और पैर प्रभावित व्यक्ति पात्र हैं, लेकिन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी वाले व्यक्ति पात्र नहीं हैं. बोर्ड ने  प्रमाणित किया कि वह देख सकते हैं, सुन सकते हैं, बोल सकते है, संवाद कर सकते हैं, पढ़ सकते हैं और लिख सकते हैं लेकिन वह खड़े नहीं हो सकते, चल नहीं सकते, कूद नहीं सकते., धक्का नहीं दे सकते.

कार्तिक कंसल के मूल विकलांगता प्रमाणपत्र में उनकी विकलांगता का स्तर 60% बताया गया था, लेकिन एम्स मेडिकल बोर्ड ने इसे 90% माना था.

रिटायर्ड IAS ने उठाया मुद्दा 

रिटायर्ड IAS अफसर संजीव गुप्ता ने कार्तिक बंसल के मुद्दे को उठाया. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके कार्तिक के बारे में सभी को बताया. उन्होंने एक्स पर लिखा कि  यह न्याय का उपहास है कि कार्तिक, जिन्होंने किसी लेखक की मदद के बिना सिविल सेवा परीक्षा दी थी, तथा जो IAS और IRS की नौकरी के लिए सभी शारीरिक योग्यताएं पूरी करते थे, उन्हें UPSC ने कोई नौकरी नहीं दी.

कार्तिक लड़ रहे हैं केस

कार्तिक कंसल ने हार नहीं मानी है. वह सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) में  2021 से उनके यूपीएससी रिजल्ट के आधार पर अपना केस लड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह लड़ने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं.  UPSC की 2021 की नोटिफिकेशन के अनुसार डिसेबिलिटी मानदंड दो चीजों- फंक्शनल क्लासिफिकेशन और फिजिकल रिक्वायरमेंट पर आधारित हैं. लेकिन सेवा के आवंटन के दौरान उन्हें कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की ओर से बताया गया कि उनका फंक्शनल क्लासिफिकेशन और फिजिकल रिक्वायरमेंट उस सेवा की आवश्यकताओं के मुताबिक नहीं हैं जिसके लिए उन्होंने आवेदन किया था.