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पश्चिम एशिया संकट पर क्या है भारत का रुख? विदेश मंत्री एस जयशंकर आज दोनों सदनों में देंगे बयान

ईरान, इजरायल और अमेरिका के जंग पर आज भारत के संसद में घमासान छिड़ सकता है. विदेश मंत्री एस जयशंकर आज दोनों सदनों में इस संवेदनशील मुद्दे पर भारत का आधिकारिक रुख स्पष्ट कर सकते हैं.

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Edited By: Shanu Sharma
पश्चिम एशिया संकट पर क्या है भारत का रुख? विदेश मंत्री एस जयशंकर आज दोनों सदनों में देंगे बयान
Courtesy: ANI

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर अब पूरी दुनिया पर पड़ना शुरु हो गया है. ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहा तनाव भारतीय संसद तक पहुंच चुका है. मिल रही जानकारी के मुताबिक बजट सत्र के दूसरे चरण में इस पर चर्चा हो सकती है. केंद्र सरकार द्वारा इस संवेदनशील मुद्दे पर सतर्क है.

केंद्र सरकार द्वारा अपने सांसदों और मंत्रियों को निर्देश दे दिए गए हैं कि कोई भी बयान देने में जल्दबाजी ना करें. आज दोनों सदनों में विदेश मंत्री एस. जयशंकर संसद में भारत का आधिकारिक रुख स्पष्ट कर सकते हैं. वे राज्यसभा में सुबह 11 बजे और लोकसभा में दोपहर 12 बजे बयान दे सकते हैं. 

ईरानी युद्धपोत की भारत ने की मदद

मीडिल ईस्ट में चल रहे तनाव पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पहले कई बार कहा है कि सभी देशों को एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने हर बार बातचीत से ही समाधान निकालने पर जोर दिया है. हालांकि इस लड़ाई के दौरान भारत ने मानवीय संवेदना दिखाई है. ईरान के युद्धपोत IRIS लवन को तकनीकी खराबी के कारण कोच्चि बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति दी गई. यह जहाज 4 मार्च को कोच्चि पहुंचा. इसके 183 चालक दल के सदस्यों को नौसेना की सुविधाओं में ठहराया गया था. सरकार की ओर से कहा गया कि यह फैसला मानवीय आधार पर लिया गया है. जयशंकर ने कहा कि यह सही कदम था. भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा की अपील की है.

क्या है भारत सरकार का रुख?

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से भारत पर गहरा असर पड़ सकता है. भारत अपनी जरूरत के लिए दूसरे देशों पर बहुत ज्यादा निर्भर है, ऐसे में अगर तनाव बढ़ता है तो तेल की कीमतें बढ़ सकती है. जिससे अर्थव्यवस्था और भी ज्यादा प्रभावित हो सकती है. पश्चिम एशिया में चल रहे इस तनाव पर सरकार संतुलित रुख अपनाकर सभी पक्षों से संवाद बनाए रखना चाहती है. हालांकि विपक्ष की ओर से सरकार की चुप्पी की आलोचना की जा रही है. कांग्रेस ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी की है. पार्टी की संसदीय रणनीति समूह ने 10 जनपथ पर की बैठक. इसमें अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित वरिष्ठ नेता शामिल हुए.