बंगाल में लागू हो रहा ‘योगी मॉडल’? सुवेंदु अधिकारी के फैसलों से राजनीतिक हलचल तेज, बढ़ने लगा सियासी पारा
पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी सरकार के फैसलों के बाद योगी मॉडल की चर्चा तेज हो गई है. बूचड़खानों पर सख्मी, स्कूलों में वंदे मातरम और अपराध पर जीरो टॉलरेंस जैसे कदमों ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है.
उत्तर प्रदेश में 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार आने के बाद योगी मॉडल पूरे देश में हिट हो रहा है. योगी आदित्यनाथ के प्रशासनिक मॉडल को बीजेपी शासित राज्यों में खूब तवज्जो मिल रही है. ताजा मामला पश्चिम बंगाल का है. जहां मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के फैसलों और बयानों में योगी मॉडल का प्रतिबिंब साफ दिख रहा है. इसीलिए उनके फैसले सियासी गलियारों में खूब सुर्खियां बटोरने के साथ ही बहस का विषय भी बन गए हैं. सियासी जानकारों का मानना है कि बीजेपी शासित राज्यों में कानून-व्यवस्था, धार्मिक मुद्दों और प्रशासनिक सख्ती को लेकर योगी सरकार की कार्यशैली को एक मॉडल के तौर पर देखा जा रहा है.
बंगाल में बूचड़खानों और वंदे मातरम पर बड़ा फैसला
पश्चिम बंगाल में गो-वंश हत्या को लेकर सख्ती बढ़ाने की बात कही गई है. पुराने कानूनों और अदालत के आदेशों का हवाला देते हुए बिना फिटनेस सर्टिफिकेट किसी भी मवेशी या भैंस की हत्या पर रोक की बात भी सामने आई है. इसके साथ ही स्कूलों में राष्ट्रगान के साथ वंदे मातरम गाने को लेकर भी चर्चा तेज है. इन फैसलों की तुलना योगी आदित्यनाथ सरकार के फैसलों से की जा रही है.
तेजतर्रार अधिकारियों को तरजीह
बतौर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल में तेज तर्रार अधिकारियों को तरजीह मिलने के संकेत अपने फैसलों से दिए हैं, ठीक उसी अंदाज में जैसी योगी आदित्यनाथ ने यूपी में किया. यूपी के आईपीएस अजयपाल शर्मा की कार्यशैली को तो चुनाव के दौरान बंगाल ने नजदीक से देख ही लिया. ऐसे अधिकारियों को बंगाल में भी तवज्जो मिलना तय माना जा रहा है.
क्या है योगी मॉडल?
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार बनने के बाद अपराध और प्रशासन को लेकर कई बड़े अभियान शुरू किए गए थे. इनमें अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति, अवैध कब्जों पर बुलडोजर कार्रवाई और महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देना प्रमुख रहा. बीजेपी शासित कई राज्यों में इसी तरह की सख्त प्रशासनिक नीति देखने को मिली है. मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, असम और राजस्थान में भी अपराध और अवैध निर्माण के खिलाफ कड़े कदम उठाए गए.
एनकाउंटर और बुलडोजर नीति पर बहस
योगी सरकार के दौरान यूपी में अपराधियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और बुलडोजर एक्शन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने. समर्थकों ने इसे कानून-व्यवस्था मजबूत करने वाला कदम बताया, जबकि विपक्ष ने इसे राजनीतिक और च्यनात्मक कार्रवाई करार दिया. अब बंगाल में अपराध और महिला सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाने के संकेतों ने एक बार फिर राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है. हालांकि ऐसे मामलों पर सियासत होना कोई नई बात नहीं है.
धर्मांतरण और धार्मिक संपत्तियों पर भी फोकस
उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू होने के बाद कई अन्य राज्यों में भी इसी तरह के कानून बनाए गए. वहीं मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं की जमीनों को भूमाफिया से मुक्त कराने के अभियान को भी बीजेपी शासित राज्यों में प्रमुखता मिली. अब तक मुख्यमंत्री द्वारा लिए एक्शन से तो बंगाल में भी इसी मॉडल को आगे बढ़ाने के संकेत मिल रहे हैं.