बंगाल की फालटा सीट पर हुआ रिकॉर्ड 86.11% मतदान, कड़ी सुरक्षा में हुआ रिपोल

पश्चिम बंगाल के फलता में दोबारा हुए मतदान में 86.11% भारी वोटिंग हुई. सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ. चुनाव आयोग ने पहले धांधली की शिकायतों के बाद यहां का चुनाव रद्द किया था.

@TheBaingan_
Kuldeep Sharma

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर गुरुवार को हुए दोबारा मतदान में मतदाताओं ने जमकर हिस्सा लिया. चुनाव अधिकारियों के मुताबिक शाम 5 बजे तक रिकॉर्ड 86.11 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई. कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच पूरे दिन मतदान प्रक्रिया काफी हद तक शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई. चुनाव आयोग ने ईवीएम में गड़बड़ी और पोलिंग बूथों पर लगे वेब कैमरों के फुटेज से छेड़छाड़ की गंभीर शिकायतों के बाद पिछले चुनाव को रद्द कर यहां दोबारा वोटिंग कराने का फैसला लिया था.

इससे पहले इस सीट पर 29 अप्रैल को वोट डाले गए थे लेकिन बड़े पैमाने पर धांधली की शिकायतें मिलने के बाद चुनाव आयोग को इसे रद्द करना पड़ा था. दक्षिण 24 परगना जिले के इस निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा हुए मतदान में 2.36 लाख से ज्यादा मतदाता वोट डालने के योग्य थे जिनमें 1.15 लाख से अधिक महिला वोटर्स और नौ थर्ड-जेंडर के मतदाता शामिल थे. सुबह 7 बजे शुरू हुई वोटिंग शाम 6 बजे तक चली.

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

पिछली बार के मुकाबले इस बार सुरक्षा व्यवस्था काफी सख्त थी. पूरे इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 35 कंपनियां तैनात की गई थीं. अधिकारियों ने बताया कि हर पोलिंग बूथ पर आठ सुरक्षाकर्मी तैनात थे जो पिछली बार की तुलना में लगभग दोगुने थे. इसके अलावा किसी भी गड़बड़ी से तुरंत निपटने के लिए 30 क्विक रिस्पांस टीमें भी अलर्ट पर रखी गई थीं.

क्या था पूरा विवाद?

फलता सीट पर राजनीतिक तनाव तब बढ़ गया था जब यह आरोप लगा कि पिछले मतदान के दौरान ईवीएम मशीनों पर इत्र जैसी चीजें छिड़की गईं और एडहेसिव टेप लगाए गए. चुनाव आयोग के पूर्व विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता को जांच के दौरान करीब 60 बूथों पर छेड़छाड़ के संकेत मिले थे. इस बार भारी सुरक्षा देखकर आम वोटर काफी खुश नजर आए. एक मतदाता ने बताया कि अब माहौल पहले से बहुत बदल चुका है. पहले लोग पोलिंग बूथ के बाहर उपद्रवियों के डर से घबराते थे लेकिन इस बार वे बिना किसी डर के वोट डालने पहुंचे.

राजनीतिक तौर पर फलता सीट तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच एक बड़ा अखाड़ा बनी हुई है. हालांकि चुनाव मैदान में छह उम्मीदवार थे लेकिन टीएमसी के प्रत्याशी जहांगीर खान ने अपना वोट नहीं डाला. उन्होंने पहले ही निजी कारणों का हवाला देते हुए चुनाव न लड़ने का ऐलान कर दिया था. गौरतलब है कि साल 2001 से फलता सीट टीएमसी का मजबूत गढ़ रही है सिर्फ 2006 में यहां माकपा को जीत मिली थी.