कतर में उत्पादन ठप होने से भारत में गैस की टेंशन, 40% LNG सप्लाई को लगा बड़ा झटका; जानें क्या है सरकार का प्लान
पश्चिम एशिया तनाव और कतर की गैस फैसिलिटी पर हमले के कारण भारत की करीब 40 प्रतिशत LNG सप्लाई प्रभावित हो गई है. सरकार गैस वितरण के लिए ऑप्टिमाइजेशन प्लान बना रही है.
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने भारत की लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी LNG की सप्लाई पर काफी असर डाला है. लगभग 40 प्रतिशत LNG सप्लाई पर असर पड़ने के साथ सरकार फर्टिलाइजर यानी उर्वरक जैसे प्रायोरिटी सेक्टर्स सहित अलग-अलग इंडस्ट्रीज के लिए गैस डिस्ट्रीब्यूशन प्लान एक 'ऑप्टिमाइजेशन प्लान' पर तेजी से काम कर रही है.
इस मामले से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पेट्रोलियम मिनिस्ट्री जल्द ही एक नया डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम फाइनल कर सकती है. यह सिस्टम मंगलवार यानी आज से ही लागू हो सकता है. फर्टिलाइजर सेक्टर में सप्लाई में कुछ कमी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. हालांकि इस कमी का असर खेती पर नहीं पड़ेगा.
क्या है सरकार की रणनीति?
पर्याप्त गैस सप्लाई: फर्टिलाइजर प्लांट को उनकी सबसे अच्छी कैपेसिटी पर काम करने के लिए काफी गैस दी जाएगी.
मेंटेनेंस टाइम: अभी गैस की कम उपलब्धता कोई बड़ी चिंता की बात नहीं है, क्योंकि कुछ फर्टिलाइजर कंपनियां इस समय का इस्तेमाल अपने प्लांट के रूटीन मेंटेनेंस शटडाउन के लिए कर रही हैं.
मंदी: फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी FAI के मुताबिक एग्रीकल्चर सेक्टर में अभी डिमांड कम है. खरीफ फसल की बुआई जून में शुरू होगी. इस दौरान खपत ठीक-ठाक रहती है, जिससे इंडस्ट्री को अपने स्टॉक को फिर से भरने और बनाए रखने का समय मिल जाता है.
बंपर स्टॉक: डेटा के मुताबिक भारत के पास काफी फर्टिलाइजर रिजर्व है, जो मुश्किल समय में एक बड़ी मदद का काम करेगा.
शुक्रवार तक कुल फर्टिलाइर स्टॉक 36.5 प्रतिशत बढ़कर 17.7 मिलियन टन (MT) हो गया, जो पिछले साल इसी समय लगभग 13 MT था. FAI के मुताबिक DAP और NPK स्टॉक पिछले साल के मुकाबले 70-80 प्रतिशत ज्यादा हैं.
फरवरी के आखिर तक एजेंसियों ने 9.8 MT फ़र्टिलाइजर इंपोर्ट किया था. इसके अलावा अगले तीन महीनों के लिए 1.7 MT और देने का शेड्यूल किया गया है. फर्टिलाइजर डिपार्टमेंट ने साफ किया है कि भारत ने फॉस्फेटिक फर्टिलाइजर के लिए अपने इंपोर्ट सोर्स को डायवर्सिफाई किया है. इससे यह पक्का होगा कि इंटरनेशनल लॉजिस्टिक प्रॉब्लम की वजह से किसानों को फर्टिलाइजर की कमी का सामना न करना पड़े.
किसके लिए हैं चुनौतियां?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि फर्टिलाइजर सरकार के लिए प्रायोरिटी है, इसलिए इसमें कोई बड़ी कटौती नहीं होगी. हालांकि, नॉन-प्रायोरिटी सेक्टर्स को कम गैस सप्लाई से काम चलाना होगा. इन इंडस्ट्रीज को अपनी एनर्जी जरूरतों को पूरा करने के लिए तुरंत दूसरे फ्यूल का इंतजाम करना होगा.
भारत अभी अपनी LNG जरूरतों का 60 प्रतिशत वेस्ट एशिया के अलावा दूसरे सोर्स से लेता है. सरकार और कंपनियां अब बाकी कमी को पूरा करने के लिए ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों से और सप्लाई हासिल करने की कोशिश कर रही हैं.
क्या हैं दो मुख्य चुनौतियां?
शिपिंग: गैस ट्रांसपोर्ट करने के लिए खास LNG टैंकरों का इंतजाम करना.
कैपेसिटी: यह पक्का करना कि नए सप्लायर देशों के पास जहाजों पर लोड करने से पहले गैस को लिक्विफाई करने की एक्स्ट्रा कैपेसिटी हो.
इस संकट का मुख्य कारण क्या है?
भारत में यूरिया प्रोडक्शन के लिए इस्तेमाल होने वाली 60 प्रतिशत LNG कतर से इम्पोर्ट की जाती है. कतर की कतरएनर्जी फैसिलिटी पर हाल ही में ईरान के हमले के बाद कतर को अपना प्रोडक्शन रोकना पड़ा, जिससे भारत की सप्लाई चेन में बड़ी रुकावट आई.