नई दिल्ली: गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी को जारी 10 पेज के आदेश से वंदे मातरम के लिए पहली बार स्पष्ट प्रोटोकॉल बनाया है. अब तक केवल राष्ट्रगान के लिए सख्त नियम थे, लेकिन अब वंदे मातरम के छह छंदों वाली पूरी रचना को आधिकारिक रूप दिया गया है.
यह संस्करण 3 मिनट 10 सेकंड का होगा और कई सरकारी मौकों पर अनिवार्य होगा. राष्ट्रगान से पहले इसे बजाया जाएगा. दर्शकों को खड़े होकर सम्मान दिखाना होगा. यह कदम स्वतंत्रता संग्राम के इस गीत को और मजबूती से स्थापित करने की दिशा में है, जिसे बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1870 के दशक में लिखा था.
छह छंदों वाला वंदे मातरम राष्ट्रपति के आगमन, उनके भाषणों से पहले और बाद में, ध्वजारोहण के समय, राज्यपालों के औपचारिक कार्यक्रमों में बजाया जाएगा. बैंड द्वारा बजाने से पहले ड्रम की रोल होगी, जो सात कदमों तक चलेगी. जब राष्ट्रगान के साथ बजाया जाएगा तो वंदे मातरम पहले आएगा. समाचार फिल्मों में बजने पर दर्शकों को खड़े होने की जरूरत नहीं होगी.
ध्वजारोहण, सांस्कृतिक आयोजनों और गैर-परेड समारोहों में बड़े पैमाने पर जन-गायन के साथ गाया जाएगा. इसके लिए प्रशिक्षित कोरस और अच्छी ध्वनि व्यवस्था होगी. गीत के बोल छपवाकर बांटे जा सकते हैं. राष्ट्रपति के गैर-औपचारिक कार्यक्रमों में भी जन-गायन अनिवार्य होगा. स्कूलों में सुबह की शुरुआत इससे हो सकती है.
स्कूलों में राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान को लोकप्रिय बनाने के लिए प्रावधान करने को कहा गया है. छात्रों में राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान बढ़ाने पर जोर है. मंत्री आदि की मौजूदगी वाले महत्वपूर्ण अवसरों पर भी जन-गायन के साथ गाया जा सकता है. सम्मानपूर्वक गायन की कोई पाबंदी नहीं, बशर्ते शालीनता बनी रहे.
1950 में केवल पहले दो छंदों को राष्ट्रीय गीत बनाया गया था. अब पूरी रचना को बढ़ावा दिया जा रहा है. पिछले साल संसद में 150वें वर्ष पर बहस हुई, जहां प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर गीत को कमजोर करने का आरोप लगाया. गणतंत्र दिवस परेड में भी थीम इसी पर आधारित थी. यह आदेश गीत की मूल भावना को मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है.