'633 छात्र की मौत, 48 स्टूडेंट्स को US ने भारत भेजा...' विदेश राज्य मंत्री का बड़ा दावा
भारत सरकार ने विदेश में रहने वाले स्टूडेंट्स को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े जारी किए हैं. इसमें रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले पांच साल में विदेश में 633 भारतीय छात्र-छात्राओं की मौत हो गई है. इन सभी छात्रों के मौत के पीछे अलग-अलग कारण है. वहीं अमेरिका 48 भारतीय छात्रों को बिना कोई कारण के भारत वापस भेज दिया है.
विदेशों में लाखों की संख्या में भारतीय बच्चे पढ़ाई करने जाते हैं लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार पिछले पांच सालों में विदेश में पढ़ने के लिए 633 भारतीय छात्र-छात्राओं की मौत हुई है. जो कि एक चौकाने वाला डेटा है. विदेश में मरने वाले छात्रों की ये संख्या काफी बड़ी है और इसके कई कारण भी हैं. विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने शनिवार को इन आंकड़ों को लोकसभा के पटल पर रखा.
आंकड़ों के मुताबिक इन छात्रों में से कईयों को तो जातिगत भेदभाव के चलते भी अपनी जान गंवाई पड़ी है. विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इस लिस्ट में सबसे पहले कनाडा का नाम है, जहां पर करीब 172 मामले दर्ज किए गए हैं. उसके बाद 108 छात्र अमेरिका में और 58 छात्र यूके में मारे गए हैं. वहीं आस्ट्रेलिया में 57 और रूस में 37 छात्रों ने अपनी जान गंवाई है.
विदेश में 633 भारतीय छात्र-छात्राओं की मौत
वहीं यूक्रेन में 18 भारतीय छात्रों की जान चली गई है. जर्मनी और जॉर्जिया में 24, किर्गिस्तान और साइप्रस में 12-12 मौतें हुई है. वहीं चीन में 8 मामले सामने आए हैं. इसके अलावा विदेश राज्य मंत्री ने छात्र निर्वाचन के बारे में चिंताओं को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले तीन साल में अमेरिका ने बिना कारण बताए 48 भारतीय छात्रों को भारत भेज दिया है. अमेरिकी एजेंसियों द्वारा इन छात्रों के बारे में कोई ऑफिशियल डेटा शेयर नहीं कही है.
'छात्रों को सुरक्षा प्रदान करना भारत सरकार..'
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने का कहना है कि भारतीय छात्रों को सुरक्षा प्रदान करना भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है. उन्होंने आश्वासन दिया है, साथ ही विदेशी विश्वविद्यालयों में नामांकित छात्रों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखने में भारतीय मिशनों की सक्रिय भूमिका पर जोर दिया है.