अमेरिका पर चढ़ा 40 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज, जानिए आखिर किस-किस का पैसा है?
अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है. इस विशाल रकम का बड़ा हिस्सा अमेरिकी निवेशकों और संस्थानों का है, जबकि विदेशी हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है.
नई दिल्ली: दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका के सामने कर्ज का आंकड़ा अब एक नए स्तर पर पहुंच गया है. अमेरिकी ट्रेजरी के अनुसार 18 अगस्त को राष्ट्रीय कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर के पार चला गया. यह रकम देश की सालाना GDP की करीब 124 प्रतिशत है. आंकड़ा जितना बड़ा है, उतना ही दिलचस्प सवाल यह भी है कि आखिर अमेरिका इतना पैसा किसका देना है. जवाब में घरेलू निवेशक, सरकारी संस्थान और विदेशी देश सभी शामिल हैं.
सरकार जब अपनी कमाई से अधिक खर्च करती है तो बजट घाटा बनता है. इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार बॉन्ड और अन्य प्रतिभूतियां बेचकर कर्ज लेती है. वर्षों के लगातार घाटे जमा होते जाएं तो राष्ट्रीय कर्ज बढ़ता जाता है. अमेरिका के मामले में कुल रकम 40 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है. हालांकि केवल कर्ज की मात्रा से संकट तय नहीं होता, बल्कि ब्याज दर और आर्थिक वृद्धि भी महत्वपूर्ण हैं.
सबसे ज्यादा कर्जदार अमेरिका खुद
अमेरिका के कुल कर्ज में करीब 7.78 ट्रिलियन डॉलर सरकार की अलग-अलग इकाइयों के बीच का कर्ज है. इसमें Social Security Trust Fund की हिस्सेदारी लगभग 2.3 ट्रिलियन डॉलर है. बाकी करीब 32.27 ट्रिलियन डॉलर जनता के पास मौजूद कर्ज है. इसका लगभग 17.9 ट्रिलियन डॉलर अमेरिकी म्यूचुअल फंड, बैंक, बीमा कंपनियां, पेंशन फंड और घरेलू निवेशक रखते हैं. यानी अमेरिकी कर्ज का बड़ा हिस्सा देश के भीतर ही है.
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विदेशी देशों में जापान सबसे बड़ा खरीदार
विदेशी निवेशकों के पास करीब 9.35 ट्रिलियन डॉलर का अमेरिकी सरकारी कर्ज है. इनमें जापान लगभग 1.21 ट्रिलियन डॉलर के साथ सबसे आगे है. ब्रिटेन करीब 937 अरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि चीन के पास लगभग 651 अरब डॉलर के अमेरिकी ट्रेजरी हैं. चीन की हिस्सेदारी 2013 के करीब 1.32 ट्रिलियन डॉलर के शिखर से घट चुकी है. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि अमेरिका मुख्य रूप से चीन का कर्जदार है.
ट्रंप के कार्यकाल में कितना बढ़ा कर्ज
जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद करीब 19 महीनों में अमेरिकी कर्ज लगभग 3.8 ट्रिलियन डॉलर बढ़ा है. उनके पहले कार्यकाल में भी करीब 7.8 ट्रिलियन डॉलर की वृद्धि हुई थी. हालांकि कर्ज बढ़ने की जिम्मेदारी किसी एक राष्ट्रपति की नहीं है. दशकों से दोनों प्रमुख दलों की सरकारों के दौरान टैक्स कटौती, युद्ध, मंदी और आपात खर्च ने घाटे को बढ़ाया है.
बढ़ती ब्याज लागत बनी बड़ी चिंता
कर्ज का सबसे बड़ा जोखिम अब उसकी ब्याज लागत है. अमेरिकी संघीय घाटा GDP के करीब 5.8 प्रतिशत पर चल रहा है, जबकि पिछले 50 वर्षों का औसत करीब 3.8 प्रतिशत रहा है. ब्याज भुगतान अकेले GDP का लगभग 3.3 प्रतिशत है. 30 साल के अमेरिकी ट्रेजरी की यील्ड हाल में 5.34 प्रतिशत तक पहुंची, जो 2007 के बाद सबसे ऊंचे स्तरों में है. ऐसे में कर्ज बढ़ने के साथ उसे संभालने की लागत भी बढ़ रही है.