प्रीति सूदन होंगी UPSC की नई अध्यक्ष, 1983 बैच की IAS अफसर के बारे में जानें सबकुछ
Preeti Sudan: 1983 बैच की आईएएस अफसर प्रीति सूदन यूपीएससी की नई अध्यक्ष होंगी. प्रीति सूदन 1 अगस्त 2024 से कार्यभार संभालेंगी. यूपीएससी, देश में शीर्ष सरकारी पदों के लिए सिविल सेवा परीक्षा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को आयोजित करने के लिए जिम्मेदार एजेंसी हैं. आइए, यूपीएससी की नई अध्यक्ष के बारे में जानते हैं.
Preeti Sudan: आंध्र प्रदेश कैडर की 1983 बैच की IAS अफसर प्रीति सूदन को संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. जुलाई 2020 में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव के पद से रिटायर हुईं सूदन को सरकारी प्रशासन के विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 37 साल काम करने का लंबा अनुभव है.
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कोरोना महामारी से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. सूदन ने खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव के रूप में भी काम किया है. साथ ही उन्होंने महिला एवं बाल विकास के साथ-साथ रक्षा मंत्रालयों में महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है. केंद्र से पहले उन्होंने राज्य स्तर पर वित्त एवं योजना, आपदा प्रबंधन, पर्यटन और कृषि डिपार्टमेंट में भी काम किया है.
प्रीति सूदन ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) से इकोनॉमिक्स में एम.फिल, सामाजिक नीति एवं नियोजन में एम.एससी. की डिग्री प्राप्त की है. उन्होंने कई राष्ट्रीय कार्यक्रमों में योगदान दिया है, जिसमें बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और आयुष्मान भारत जैसे प्रमुख कार्यक्रम शुरू करना शामिल है. उनके प्रयासों से राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और ई-सिगरेट पर प्रतिबंध जैसे महत्वपूर्ण कानून बने हैं.
वर्ल्ड बैंक के साथ सलाहकार के रूप में भी काम कर चुकी हैं प्रीति सूदन
प्रीति सूदन ने वर्ल्ड के साथ सलाहकार के रूप में काम किया है और तम्बाकू नियंत्रण पर फ्रेमवर्क कन्वेंशन के COP-8 की अध्यक्ष के साथ-साथ मातृ, नवजात और बाल स्वास्थ्य के उपाध्यक्ष जैसे प्रमुख पदों पर काम किया है. वे वैश्विक डिजिटल स्वास्थ्य भागीदारी की अध्यक्ष और महामारी की तैयारी और प्रतिक्रिया के लिए WHO के स्वतंत्र पैनल की सदस्य भी रह चुकीं हैं.
हाल ही में अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति से पहले, वे 29 नवंबर, 2022 को संघ लोक सेवा आयोग में सदस्य के रूप में शामिल हुईं थीं. चार जुलाई को यूपीएससी के अध्यक्ष डॉक्टर मनोज सोनी ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा था, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया था.